यूरोपीय यूनियन (EU) से अलग होगा ब्रिटेन

यूरोपीय यूनियन (EU) से अलग होगा ब्रिटेन

43 सालों तक साथ रहने के बाद ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन से बाहर होगा। जनमत संग्रह के नतीजों के सामने आने के बाद अपने पहले संबोधन मे ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा कि ब्रिटेन की जनता के फैसला का स्वागत करता हूं। ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था काफी मजबूत है इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है। आगे उन्होंने कहा की वो अगले तीन महीने तक ब्रिटेन के प्रधानमत्री रहेंगे। यानि अक्टूबर तक कैमरन पीएम बने रहेंगे ।

  • जनता के फैसले का सम्मान- डेविड कैमरन
  • अगले तीन महीने तक पीएम बना रहूंगा- डेविड कैमरन

यूरोपीय यूनियन में ब्रिटेन रहे या बाहर निकल जाए इसे लेकर 23 जून को ब्रिटेन में जनमत संग्रह कराए गए। जनमत संग्रह के नतीजों में 51.9 फीसदी लोगों ने यूरोपीय यूनियन से बाहर होने की इच्छा जताई जबकि 48.1 फीसदी लोग यूरोपीय यूनियन के साथ रहने के पक्ष में थे। यानि जनमत संग्रह के नतीजों के बाद यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन अलग हो गया। हलांकि कहा ये जा रहा है कि ब्रिटेन को पूरी तरह से यूरोपीय यूनियन से अलग होने में तकरीबन 2 साल का वक्त लगेगा।

ब्रिटेन में जैसे जैसे जनमत संग्रह के रुझान सामने आ रहे थे उसके साथ ही ये भी साफ होने लगा था कि यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन का अलग होना तय है। जिसका असर पौंड और भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला। सेंसेक्स की गिरावट 1000 से ज्यादा अंकों तक पहुंच गई वहीं निफ्टी भी 300 से ज्यादा अंकों तक गिर गया। रुपये में भी गिरावट देखी गई। केवल भारतीय बाजार ही प्रभावित नहीं हुए। पाउंड भी अपने बुरे दौर मे पहुंच गया। नतीजे आने से पहले पाउंड 1.50 डॉलर पर चल रहा था। लेकिन जब नतीजों का रुझान यूरोपीय यूनियन से अलग होने के पक्ष में दिखने लगा तो पाउंड 1.14 डॉलर पर आ गया। पाउंड में आई ये गिरावट 1985 के बाद सबसे निचले स्तर पर था।

कैसे शुरु हुई EU से अलग होने की मांग ?
2008 में ग्रेट ब्रिटेन में आर्थिक मंदी ने अपने पैर पसार लिए। जिसकी वजह से वहां बेरोजगारी बढ़ गई। तभी से ये मांग उठने लगी कि ब्रिटेन को यूरोपीय यूनियन से अलग हो जाना चाहिए। इस मांग को 2015 में ब्रिटेन में हुए आम चुनाव में यूकेआईपी यानि यूनाइटेड किंगडम इंडिपेंडेंट ने उठाया। जिसका मानना है कि अगर ब्रिटेन यूरोपीय यूनियन से अलग हो जाता है तो उसकी सारी दिक्कत खत्म हो जाएगी। ब्रिटेन 1973 से यूरोपीय यूनियन का सदस्य था।

अलग होने से ब्रिटेन को क्या फायदा होगा ?
EU से अलग होने पर जो सबसे बड़ा फायदा ब्रिटेन को होनेवाला है वो है आर्थिक। जिसमें यूरोपीय यूनियन के बजट के लिए उसे 9 अरब डॉलर नहीं देना होगा। ब्रिटेन की सीमाओं में बगैर रोक टोक आवाजाही पर रोक लगेगी। फ्री वीजा पॉलिसी के तहत होनेवाले नुकसान में कमी आएगी। अब ब्रिटेन व्यापार के मामले में यूरोपीय यूनियन की तरफ से बनाए गए नियमों का पालन करने के लिए बाध्य नहीं होगा। ब्रिटेन अब अपने मुताबिक कानून बना सकता है।

ब्रिटेन को क्या-क्या नुकसान होगा?
ब्रिटेन के जीडीपी को 1 से 3 फीसदी का नुकसान हो सकता है। ब्रिटेन के लिए सिंगल मार्केट सिस्टम खत्म हो जाएगा। दूसरे यूरोपीय देशों में कारोबार से जुड़ी दिक्कत होगी ब्रिटेन को। जो ब्रिटेन के लोग यूरोपीय यूनियन के दूसरे देशों में बसे हुए हैं उनके लिए बड़ी मुश्किल आनेवाली है। क्योंकि उन्हें वहां रहने और व्यापार करने के लिए नए सिरे से इजाजत लेनी होगी।

क्या है यूरोपीय यूनियन ?
यूरोपीय यूनियन 28 देशों का संगठन था (ब्रिटेन के अलग होने के बाद अब इसमें 27 देश बचे हैं।1957 में 6 देश (बेल्जियम, फ्रांस, इटली, लक्जमबर्ग, नीदरलैंड्स) ने मिलकर इसकी नींव रखी थी। 2015 के आंकड़ों के मुताबिक यूरोपीय यूनियन की आबादी 50 करोड़ के आसपास है। इसके सभी देशों में एक ही करेंसी चलती है। यूरोपीय यूनियन में शामिल देशों के नागरिक इन 28 देशों में से किसी भी देश में रह सकते हैं और व्यापार कर सकते हैं। जिसे फ्रि ट्रेड कहा जाता है। यूरोपीय यूनियन का अपना संविधान है। जिसे मानना सभी सदस्य देशों के लिए जरुरी है।

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