कैंसर का पता पांच साल पहले पता चल सकता है, कराना होगा एक टेस्ट

नई दिल्ली:  आज की तारीख में कैंसर एक महामारी की तरह है। कब किसे कैंसर हो जाए अबतक इसके बारे में पता करना काफी मुश्किल है। हलांकी लगातार हो रहे शोध की मदद से काफी हद तक कैंसर का इलाज करवा लिया जाता है लेकिन इसके बावजूद कई लोगों की मौत इसकी वजह से हो रही है। अमेरिका में ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी के रिसर्च में जो बात निकलकर सामने आई है वो काफी राहत वाली है। जिसमें कहा जा रहा है कि ब्रेन कैंसर के लक्षण विकसित होने से पांच साल पहले ही इसका पता लगाया जा सकता है। लेकिन अभी ये रिसर्च प्रारंभिक दौर में है।

यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता श्र्वार्त्जबौम के मुताबिक ब्रेन कैंसर के मरीजों को कैंसर के लक्षण विकसित होने से पांच साल पहले इम्यून सेल्स को जानकारी आगे बढ़ाने वाले प्रोटीन कणों के बीच इंटरैक्शन कम होने लगता है। कैंसर पर हुए इस स्टडी की रिपोर्ट एक मेडिकल पत्रिका PLOS ONE में छपी है। जिसमें बताया गया है कि सबसे सामान्य प्रकार के ग्लिओमा के लिए औसत जीवित रहने का समय 14 महीने है। सिर दर्द, याददाश्त का कामजोर होना, पर्सनालिटी में बदलाव, धुंधला दिखाई देना और बोलने में जुबान लड़खड़ाना इसके लक्षण हैं।

श्र्वार्त्जबौम के मुताबिक अगर हम अधिक प्रभावी ढंग से इलाज की उम्मीद करते हैं तो ट्यूमर के विकास के शुरुआती चरण में ही उसकी पहचान हो जानी चाहिए। अगर शुरुआती चरण में ही ट्यूमर का विकास रोक दिया जाए तो इसका इलाज भी संभव हो पाएगा। लेकिन अभी औसतन होता ये है कि ट्यूमर का पता तब चलता है जब तीन महीने का वक्त हो चुका होता है।

श्र्वार्त्जबौम ने 974 लोगों के ब्लड सैंपल पर ये परीक्षण किया। उनमें से 50 फीसदी लोगों ने ब्लड सैंपल लेने के बाद ब्रेन कैंसर का इलाज करवाया। श्र्वार्त्जबौम की दिलचस्पी साइटोकिन्स की भूमिका में थी। दरअसल साइटोकिन्स एक प्रोटीन है जो इम्यून सेल्स के साथ प्रतिरक्षा के लिए संदेश देता है। श्र्वार्त्जबौम ने खून के नमूनों में 277 साइटोकिन्स का मूल्यांकन किया। जिसमें पाया गया कि जिन लोगों को कैंसर हुआ उनके खून में साइटोकिन्स का इंटरेक्शन कम था।

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