यूपी को नया सीएम देने के लिए बीजेपी 13 अप्रैल का इंतजार कर रही है?




नई दिल्ली:  11  मार्च को विधानसभा चुनाव के जब नतीजे आए तो माना जा रहा था होली की सुबह बीजेपी यूपी के लिए सीएम के नाम का एलान कर देगी। लेकिन अगली सुबह के बाद शाम भी बीत गई उसके बाद फिर एक सुबह आई। दिल्ली के बीजेपी मुख्यालय में बीजपी के बड़े नेताओं की बैठक भी हो गई लेकिन यूपी के लिए सीएम का चेहरा अबतक कमल की पंखुड़ियों के बीच से बाहर निकल कर नहीं आया है।

14 मार्च को ये खबर सामने आई थी कि 16 मार्च को यूपी के विधायक दल की बैठक होगी। उसके बाद सीएम का नाम तय कर दिया जाएगा। लेकिन 16 मार्च को न तो विधायक दल की बैठक हुई और न ही यूपी के लिए सीएम का नाम तय हुआ। अब कहा जा रहा है 18 मार्च को विधायक दल की बैठक होगी। लेकिन इसबार ये नहीं बताया जा रहा है कि 18 मार्च की विधायक दल की बैठक के बाद यूपी में सीएम का सस्पेंस खत्म होगा या अगली तारीख के लिए उसे टाल दिया जाएगा।

हलांकी सीएम के नाम का एलान उत्तराखंड के लिए भी नहीं किया गया है। लेकिन वहां के बारे में साफ हो चुका है कि 18 मार्च वहां बीजेपी की नई सरकार का शपथ ग्रहण होगा। उस शपथ ग्रहण में पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी जाएंगे। हलांकी नाम तय करने से पहले शपथ ग्रहण की तारीख का एलान कर दिया गया है। इसका मतलब ये है कि पार्टी ने नाम भी तय कर लिया है।

लेकिन यूपी के बारे में ऐसा नहीं है। वहां अभी भी तय नहीं है कि बीजेपी किसे सीएम बनाएगी। क्योंकि नतीजे आने के बाद से अबतक कई नए नाम भी सीएम की रेस में शामिल हो चुके हैं। लेकिन राजनाथ सिंह का नाम पहले नंबर पर और मनोज सिन्हा का नाम दूसरे नंबर पर चल रहा है। खासबात ये है कि राजनाथ सिंह संघ की पसंद हैं जबकि मनोज सिन्हा पीएम मोदी और अमित शाह की पसंद हैं।




लेकिन यूपी में नई सरकार के गठन और नए सीएम के नाम के एलान के पीछे कुछ शुभ अशुभ संयोग को मानने के कयास भी लगाए जा रहे हैं। बीजेपी को इस बात का एहसास है कि यूपी में बाकी राज्यों के मुकाबले चुनौती बड़ी होगी। इसलिए पार्टी इस राज्य में हर शुरुआत शुभ घड़ी में करना चाहती है। और अभी खरमास का महीना चल रहा है। जो 13 अप्रैल तक चलेगा।

खरमास के इस एक महीने में किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है। मामूली काम की शुरुआत भी खरमास में नहीं की जाती है। फिर यहां तो देश के सबसे बड़े प्रदेश में शासन चलाने की बात है। उत्तर प्रदेश देश का वो प्रदेश है जहां से होकर ही दिल्ली का रास्ता गुजरता है। ये भी तय है कि इस प्रदेश का असर 2019 के लोकसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। इसलिए सवाल उठ रहा है कि कहीं बीजेपी 13 अप्रैल का इंतजार तो नहीं कर रही है यूपी में अपने शासन की शुरुआत करने के लिए। क्योंकि 13 अप्रैल को खरमास खत्म हो रहा है।

अब ये जान लेते हैं कि यूपी में कबतक नई सरकार का गठन किया जा सकता है। अखिलेश सरकार ने 15 मार्च 2012 को सीएम पद की शपथ ली थी। इसलिए व्यवहारिक तौर पर कार्यकाल 14 मार्च 2017 तक होता है। लेकिन यूपी विधानसभा की पहली बैठक 28 मई 2012 को हुई थी। इसलिए 28 मई 2017 तक नई विधानसभा का गठन हो जाना चाहिए। इस लिहाज से बीजेपी के पास अपना नया सीएम चुनने के लिए वक्त की कमी नहीं है। इसलिए माना जा रहा है कि पार्टी किसी तरह से नए सीएम का एलान खरमास के खत्म होने तक टालने का मन तो नहीं बना रही है।

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