कांग्रेस सोती रही और गोवा में गेम हो गया, बीजेपी सरकार की INSIDE स्टोरी




नई दिल्ली: 11 मार्च को जब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तो यूपी, उत्तराखंड और पंजाब की तस्वीर तो साफ थी। लेकिन गोवा और मणिपुर में पेंच फंसा हुआ था। इन दोनों राज्यों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी थी। लेकिन इतनी बड़ी भी नहीं थी कि वो अपने दम पर सरकार बना सके। गोवा में कांग्रेस ने 17 सीट जीती थी जबकि बीजेपी ने 13 सीट। गोवा में सरकार बनाने के लिए 21 विधायकों की जरुरत थी।

11 मार्च को ही नतीजे आने के बाद साढ़े तीन बजे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में प्रेस कांफ्रेंस की। जिसमें उन्होंने सभी को जीत की बधाई दी। साथ ही ये भी साफ कर दिया कि गोवा और मणिपुर में भी वो सरकार बनाएंगे। लेकिन इसपर सभी को विश्वास नहीं हुआ। क्योंकि इन दोनों राज्यों में बीजेपी दूसरे नंबर की पार्टी थी।

अमित शाह ने पहले गोवा के लिए अपनी रणनीति तैयारी की। और शाम के 7 बजे एक फोन से उस रणनीति पर अमल करने की शुरुआत हुई। बीजेपी नेता नितिन गडकरी ने खुद 11 मार्च के रात की पूरा कहानी सुनाई। जिसमें उन्होंने कहा 11 मार्च को शाम के 7 बजे अमित शाह का फोन उनके पास आया और कहा वो मुझसे मिलना चाहते हैं। जिसके बाद नितिन गडकरी ने कहा मैं ही आपके पास आ जाता हूं। इसके बाद नितिन गडकरी अमित शाह से मिलने उनके घर पहुंचे। अमित शाह के घर पर गोवा की राजनीतिक स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई। गडकरी ने आगे कहा अमित शाह ने मुझसे कहा गोवा में हमें सरकार बनानी है। उन्होंने मुझे तुरंत गोवा रवाना होने को कहा।

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इसके बाद गडकरी गोवा रवाना होने के लिए अपने घर से निकले। लेकिन अपने घर से एयरपोर्ट पहुंचने के बीच उन्होंने गोवा के तमाम नेताओं से बात की। गडकरी ने बताया कि उन्होंने गोवा में नेताओं से कहा कि वो रात साढ़े बारह बजे तक वहां आ रहे हैं। गडकरी ने कहा पणजी पहुंचते ही लीडर्स के डेलीगेशन ने मुझसे मुलाकात की और मुझे बताया कि पर्रिकर का डिफेंस मिनिस्टर से इस्तीफा देकर गोवा आना ठीक नहीं रहेगा। मैंने इस बारे में मनोहर पर्रिकर से भी बात की। एलायंस करनेवालों ने समर्थन की इच्छा जाहिर की। लेकिन पर्रिकर को सीएम बनाने की शर्त रख दी।




गडकरी ने आगे बताया रात के डेढ़ बजे एमजीपी के सुदिन धवलीकर ने मुझसे मुलाकात की। मैं उन्हें लंबे समय से जानता था। हमने चर्चा की और उन्होंने हमें सपोर्ट करने की बात कही। उनके बाद गोवा फॉरवर्ड पार्टी के विजय सरदेसाई ने मुलाकात की। गडकरी ने आगे कहा सुबह पांच बजे एमजीपी और जीपीएफ ने एक शर्त रखी कि बीजेपी को सपोर्ट तभी करेंगे जब सीएम पर्रिकर बनेंगे।

गडकरी ने आगे कहा मैंने सुबह सवा पांच बजे अमित शाह को कॉल कर उठाया और इस बारे में बताया। मैंने कहा कि मैं इस बारे में फैसला नहीं कर पा रहा हूं और आपकी सलाह चाहता हूं। उन्होंने कहा कि प्राइम मिनिस्टर अभी सो रहे हैं। मैं उन्हें 7 बजे फोन करुंगा। अगर पर्रिकर को गोवा भेजना है तो फैसला बीजपी पार्लियामेंट्री बोर्ड करेगा और पर्रिकर की राय भी जाना जाएगा।

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इसके बाद अमित शाह ने 12 मार्च को सुबह साढ़े आठ बजे फोन किया। उन्होंने कहा कि मैंने पीएम और दूसरे नेताओं से बात की। सभी का कहना है कि अगर हम गोवा में सरकार बना सकते हैं और पर्रिकर राजी हैं तो हमें ऐसा करना चाहिए।

इसके बाद तीनों सहयोगी दलों एमजीपी, जीएफपी और निर्दलीय विधायकों से समर्थन पत्र लेकर उसी दिन शाम को पर्रिकर ने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया।

यानि जिस वक्त कांग्रेस इस उधेड़बुन में लगी थी कि वो किस तरह से छोटे दलों से बातचीत शुरु करे उतने में बीजेपी ने गोवा में सरकार बनाने की अपनी पूरी रणनीति को कामयाब कर लिया।

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