टैंकर घोटाले में दिल्ली BJP ने केजरीवाल को दी कार्रवाई करने की चुनौती

टैंकर घोटाले में दिल्ली BJP ने केजरीवाल को दी कार्रवाई करने की चुनौती

  • 400 करोड़ के टैंकर घोटाले में कार्रवाई से क्यों भाग रही है दिल्ली सराकर ?
  • BJP की चुनौती का क्या जवाब देंगे केजरीवाल ?

भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात करनेवाली दिल्ली सरकार की आवाज 2012 में हुए टैंकर घोटाले तक आकर दम तोड़ देती है। दिल्ली सरकार की इसी बेबसी को दिल्ली बीजेपी ने अपना हथियार बनाया है। इसबार बीजेपी ने दिल्ली में पोस्टर लगाकर दिल्ली सरकार को टैंकर घोटाले में शामिल दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की चुनौती दी है। 2012 में ये घोटाला तब सामने आया था जब दिल्ली में शीला दीक्षित की सरकार थी। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल कई मौकों पर हर घोटालेबाजों के खिलाफ कार्रवाई करने की कसमें खा चुके हैं लेकिन जब बात टैंकर घोटाले की सामने आती है तो एक अजीब सी नरमी आ जाती है दिल्ली सरकार के तेवर में। टैंकर घोटाले में तकरीबन 400 करोड़ के हेराफेरी की बात सामन आई है।

kapil-mishraबीजेपी ने अपने पोस्टर में कहा है कि टैंकर घोटाले पर बनी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने जल मंत्री कपिल मिश्रा को अगस्त 2015 में ही इससे जुड़ी रिपोर्ट सौंप दी थी। साथ ही केजरीवाल को चुनौती दी है कि इस मामले में कार्रवाई करके दिखाएं। पोस्टर के जरिये बीजेपी ने भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस के वादे की याद दिल्ली सरकार को दिलाई है। साथ ही ये मांग भी की गई है कि इस मामले को सीबीआई के हवाले कर दिया जाए।
कैसे खेला गया घोटाले का खेल ?

दिल्ली में जब केजरीवाल सरकार आई तो दिल्ली जल बोर्ड को स्टील वाटर टैंकर मुहैया कराने की योजना से जुड़े टेंडर प्रक्रिया की जांच के लिए कमेटी बनाई। जिस टेंडर को 2012 में मंजूरी मिली थी उसे उससे पहले पांच बार रद्द किया जा चुका था। उसी साल जलबोर्ड को 400 वाटर टैंकर मिले जिसे एक निजी कंपनी की तरफ से सप्लाई किया गया था। लेकिन वाटर सप्लाई में कई इलाकों से शिकायत आनी शुरु हो गई। इस पूरी गड़बड़ी पर सूत्र ये बताते हैं कि जांच कमेटी की रिपोर्ट में जल बोर्ड के अधिकारियों और कुछ सदस्यों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। जिसमें तब की सीएम शीला दीक्षित के साथ साथ जलबोर्ड के सदस्य मतीन अहमद, जल बोर्ड के सीईओ, वित्त सदस्य, प्रोजेक्ट इंजीनियर, एनईईएजी (हैदराबाद) का नाम भी सामने आया है। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि पांच बार रद्द किये जाने के बाद 360.55 करोड़ के नुकसान पर टेंडर पास किया गया। अगर टैंकर के टेंडर के लिए सही तरीके से काम किया जाता तो इस नुकसान से बचा जा सकता था। यहीं पर ये सवाल भी उठता है कि जब जांच कमेटी की रिपोर्ट में गड़बड़ी की बात सामने आ चुकी है तो फिर केजरीवाल सरकार इसपर कार्रवाई से पीछे क्यों हट रही है। बीजेपी ने अपने पोस्टर में भी यही सवाल पूछे हैं।

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