बिहार के साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों को SC से बड़ा झटका

नई दिल्ली:  बिहार के नियोजित शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने नियोजित शिक्षकों की की समान काम के लिए समान वेतन की याचिका खारिज कर दी। इससे पहले पटना हाईकोर्ट ने नियोजित शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया था। जिसके बाद बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जहां से सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर बिहार के साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षकों पर पड़ेगा। बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी थी कि समान काम के लिए समान वेतन देने पर सरकार पर 33 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। जिसे सरकार नहीं दे सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने आर्थिक परेशानी की सरकार की इस दलील को समझा और हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया।

अगर सुप्रीम कोर्ट से नियोजित शिक्षकों के पक्ष में फैसला आता तो उनकी वेतन 35-40 हजार तक हो जाता। शिक्षकों का वेतन केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देती है। जिसमें 70 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार की तरफ से और 30 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार देती है।

2009 में माध्यमिक शिक्षक संघ ने पटना हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उस याचिका में समान काम के लिए समान वेतन की मांग की गई थी। हाईकोर्ट ने नियोजित शिक्षकों के पक्ष में फैसला दिया था। जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट में 11 याचिकाओं पर 24 अलग अलग दिन सुनवाई की गई। सुप्रीम कोर्ट में 3 अक्टूबर 2018 को सुनवाई पूरी हो गई थी। लेकिन कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। जिसपर 10 मई 2019 को फैसला सुनाया गया।

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