सुपौल के इस गांव में आज भी प्रचलित है 1रुपये और 8 किलो दूध की परंपरा

प्रियांशु आनंद/सुपौल

सुपौल/बिहार:  जहां एक ओर लोग अपने परिवार वालों की मदद करने से कतराते हैं, वहीं बिहार के सुपौल के एक गांव में सदियों पुरानी परंपरा ने पूरे गांव को एकसूत्र बांध रखा है। सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर एक इकलौता ऐसा गांव है जहां आज भी लोग सदियों पुरानी परंपरा का  निर्वाह करते आ रहे हैं।

श्राद्धकर्म मुंडन और बेटी की शादी में ग्रामीण एकत्रित होकर आयोजन करने वाले के घर में एक रुपये और आठ किलो दूध देने की परंपरा का निर्वाह करते हैं। गांव वालों की  यह परंपरा लोगों के बीच प्रेरणा बनी है।
क्या है परंपरा
आयोजन से पूर्व ग्रामीणों की बैठक होती है। जिसमें सामूहिक निर्णय के बाद आयोजनकर्ता के घर दूध पहुंचाने का सिलसिला प्रारंभ कर दिया जाता है। इस कारण आयोजक को कई कठिनाई से छुटकारा मिल जाता है। वहीं गांव की इस परंपरा से ग्रामीणों में एकता बनी रहती है। खास बात यह कि अगर किसी कारणवश किसी व्यक्ति ने दूध नहीं दिया तो आयोजन के उपरांत भोज में खाने के वक्त पत्तल पर एक रुपया रख कर यह जताया जाता है कि उसने दूध नहीं दिया।

सदियों पुरानी परंपरा में किसी भी तरह की सामाजिक बंधन नहीं है। अलबत्ता आज भी यह समाज को जगाने वाली परंपरा से लोग काफी खुश हैं।
सदियों से चल रही यह परंपरा
ग्रामीणों के मुताबिक यह सिलसिला उनके बाप और दादा के समय से भी पूर्व से यह चलती आ रही है। ऐसे सकारात्मक सोच को लेकर ग्रामीणों द्वारा इसे जारी रखा गया है।

Loading...