सुपौल:त्रिवेणीगंज में खुदाई करने पर पुराने सभ्यता के मिल रहे हैं निशान, Video

प्रदीप जैन/सुपौल
सुपौल/बिहार:जिला मुख्यालय से तकरीबन 45 किमी दूर त्रिवेणीगंज प्रखंड मुख्यालय अंतर्गत बाजितपुर गांव में पुरानी सभ्यता से जुड़े अवशेष मिल रहे हैं जिससे लोगों में उत्सुकता बढ़ गयी है स्थानीय लोग इसे हजारों साल पुरानी सभ्यता से इसे जोड़ कर देख रहे है।

स्थानीय ग्रामीणों को इसका पता आज से दस वर्ष पूर्व लग गया था लेकिन लालच वश कई जमीन के मालिकों ने इसकी भनक किसी को नही लगने दी इसके पीछे खजाने की तलाशी भी वजह बनी।गुपचुप तरीके से इसकी खुदाई कर लोग खजाने की तलाश में जुटे रहे।

लेकिन इसकी भनक मिलते ही अन्य लोगो ने भी खुदाई चालू कर दी।इस दौरान एक छोटे तलाब से कई मिट्टी के घड़े मिले थे जिसमें तांबे के पैसे बड़ी मात्रा में रखे हुए पाए गए।लेकिन तांबे के पैसे किधर गये किसी को पता नही चल पाया।अमूमन आज भी खुदाई के दौरान जमीन से तीन से चार फुट नीचे 9 फिट चौड़े और 9 फिट लंबे ईंट से बने मकान के अवशेष मिल रहे है।

ईंटो की सामान्य लंबाई और चौड़ाई काफी भिन्न है।डेढ़ फिट लंबे और एक फिट चोरे ईंट पर तीर सरीखे चिन्ह मौजूद है।खुदाई के दौरान ऐसी कई चीजें मिली जो इसके पांच हजार वर्ष पुरानी सभ्यता से जुड़े होने का संकेत देती है।खुदाई में मिट्टी के घड़े मिट्टी के खिलौने पत्थरो की छोटी शिलाएं अब भी मिल रही है।

ढाई सौ एकड़ में फैले क्षेत्र में कही पर भी खुदाई होने से कुछ न कुछ मिलता रहता है।आमतौर पर खुदाई में सिक्के पुरानी सभ्यता के संकेत दे रही है।इसकी पहली बार जानकारी उस समय हुई जब भूकम्प के बाद लोगो ने जगह जगह जमीन पर दरार पड़ती देखी शंका को लेकर जब खुदाई की गई तो चोंकाने वाले परिणाम सामने आने लगे जिससे लोग भी हतप्रभ हो गए।

जमीन के इस भूभाग पर अधिक स्थानों पर लोगो ने घर बना लिए है जबकि आधे से अधिक स्थानों पर लोगो खेती करते है।इसे लेकर गांव के कई बुद्धिजीवियों ने इसके उत्खनन की मांग पुरातत्व विभाग से की ,इतना ही नहीं हाल के बीते वर्षों में बाजितपुर पहुचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी ग्रामीणों द्वारा कई अवशेष भेंट कर पुरानी सभ्यता के खोज को लेकर अपनी मांग रखी लेकिन अबतक इसके खुदाई और सभ्यता से जुड़े इसके प्रमाणिकता को लेकर कोई पहल नही शुरू हो पाई।

कालांतर में बाजितपुर की सभ्यता काफी विकसित थी लेकिन आपदाओं या अन्य वजहों से यहाँ की सभ्यता विलीन हो गयी यह कब हुआ इसका अंदाजा लोगों को नहीं है कुछ बुजुर्गों से सुनी बातों को लेकर लोग कई तरह के चर्चा आज भी करते हैं ।लेकिन मिल रहे अवशेष इसके प्रमाणिकता के लिए काफी है।

9 फिट चौड़े और 9 फिट लंबे मकान आज भी जमीन में दबे पड़े है।ऐसे भी कई किसान परिवार है जिन्होंने जमीन खोद कर ईट से मकान का निर्माण कर लिया है।जरूरत इस बात की है कि इसका उत्खनन कर इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का पता किया जाना चाहिए जिससे कोशी सरीखे इलाके में जो कभी पुराने सभ्यता से जुड़े थे।

जिसकी अपनी एतिहासिक वजूद हुआ करती थी।जिसकी जानकारी दुनिया के समक्ष आ सके यह तभी संभव है जब पुरातत्व विभाग इसकी खोजबीन करे। फिलहाल लोग इसे लेकर तरह तरह के सिर्फ कयास ही ही लगा रहे है।

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