सुपौल: पंचायत का तालिबानी फरमान, दुल्हन से थूक चटवाया, बिना दहेज शादी की सजा, Video

प्रियांशु आनंद/सुपौल

सुपौल/बिहार:  बिहार के सुपौल में वो घटना सामने आई है जिसने पूरे समाज को शर्मसार कर दिया है। यहां नव दंपत्ति को पंचायत ने अपना तालिबानी फरमान सुनाया। जिसमें सार्वजनिक तौर पर लोगों की मौजूदगी में दुल्हन से थूककर चाटने के लिए कहा और उसके पति को पूरी पंचायत और गांववालों के सामने उठक बैठक करवाई गई। यही नहीं इस दंपत्ति से 11 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी वसूला गया। क्योंकि इन्होंने बिना दहेज के प्रेम विवाह किया था।

ये घटना सुपौल के मरौना थाना की है। जहां दो प्यार करनेवाले ने बिना किसी दहेज के शादी कर ली। दोनों के घरवालों को भी इस शादी से कोई आपत्ति नहीं थी। शादी के बाद दोनों खुशी खुशी अपने घर पहुंचे। घरवालों ने उनका स्वागत भी किया। लेकिन आतंकी की शक्ल में बैठे गांव के पंचों को ये बात नागवार गुजरी। आनन फानन में पंचायत बैठाई गई। और शादी के बंधन में बंधे नव दंपत्ति के खिलाफ सजा का एलान कर दिया गया।

क्या है पूरा मामला?

दुल्हन का नाम जूली कुमारी है जबकि दुल्हे का नाम संजीत कुमार है। दोनों सुपौल के ग्राम बड़हारा थाना मरौना के रहनेवाले हैं। इनदोनों का कसूर केवल इतना था कि दोनों ने एक दूसरे से प्यार किया और बिना किसी तरह के दहेज के दोनों ने शादी कर ली। इन दोनों के बीच कई सालों से प्रेम संबंध था। घरवाले मना ना कर दें इसलिए दोनों ने चुपचाप शादी कर ली। इनकी शादी के बाद दोनों के घरवालों ने भी इस रिश्ते को अपनी मंजूरी दे दी।

लेकिन यहां पंचायत विलेन बना बैठा था। बिल्कुल आदर्श तरीके से जब जूली और संजीत का प्यार परवान चढ़ा तो पंचायत में बैठे पंचों की तालिबानी सोच ने इन्हें मुजरिम करार दे दिया। और भरी पंचायत में उठक बैठक करवाई गई और लड़की से थूक चटवा कर ये कबूल करवाया गया कि उसने बहुत बड़ी गलती की है।

पुलिस को खबर नहीं?

ये पूरी घटना सरकार की उस नीती और दावों पर करारा प्रहार है जिसमें लोगों को दहेज मुक्त विवाह के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। गांव के बीच में नव दंपत्ति के अरमानों को आतंकी सोच रखनेवालों ने कुचल कर रख दिया और किसी कोतवाली तक ये खबर नहीं पहुंची। सरकारी मशीनरी का सारा तामझाम उन चंद आतंकी सरपंचों के सामने नमस्तक हो गया, जिन्होंने एक दुल्हन के अरमानों को बेरहमी से कुचल दिया। एक दूल्हे ने नई जिंदगी की शुरुआत के साथ जो ख्वाब संजोए थे उसे ये कह दिया गया कि ये सुपौल की पंचायत है, जो ना तो प्यार करने की इजाजत देता है और ना ही उसकी मर्जी के बिना कोई घर बसा सकता है। क्योंकि बिहार में कोतवालों की सरहद कोतवाली की चहारदीवारी के भीतर तक सीमित होती है और बाहर विक्रित मानसिकता वाले पंचों की बादशाहत चलती है।

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