सुपौल: किस्मत ने राजेश को दिव्यांग बनाया लेकिन सिस्टम ने सड़क पर ला दिया

प्रदीप जैन/सुपौल

सुपौल/बिहार:  दिव्यांग राजेश पेंशन के लिए दर दर की ठोकरें खाने को विवश है। दोनों पैरों से लाचार दिव्यांग राजेश पासवान पिपरा के महेशपुर वार्ड नं 12 का निवासी है। कुदरत ने ऐसा सितम ढाया की तीन बच्चों ने घर में जन्म लिया लेकिन आर्थिक कमजोरी के कारण वक्त पर इलाज नही होने से तीनों बच्चे की मौत हो गई।आलम यह है कि निसंतान राजेश को भीख मांग कर गुजारा करना पड़ता है। दुर्भाग्य ऐसी की पत्नी भी दिव्यांग है।

विगत एक साल से पेंशन के लिये ऑफिस के चक्कर काट रहे राजेश को अबतक मिला तो सिर्फ आश्वासन। बीडीओ से लेकर डीएम तक आवेदन देकर गुहार की लेकिन कामयाबी हासिल नही हुई। गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर करने वाले इस दंपति की कठिनाई यहीं समाप्त नहीं होती बल्कि राजेश का आरोप है कि ऐसे दिव्यांग हैं जिन्हें मामूली कठिनाई है उन्हें रिक्शा उपलब्ध करा दी गई जबकि उसे दरकिनार कर दिया गया।

सरकार की अनदेखी से आहत राजेश ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए मांग की है कि उसे पेंशन सहित रिक्शा उपलब्ध कराया जाए। जिससे वो दो जून की रोटी का जुगाड़ कर सके। पड़ोस के लोगों के मुताबिक राजेश की माली हालत इस लायक नहीं है कि घर बैठ कर जीवन का निर्वाह कर पाए। स्थानीय लोगों की मदद और भीख मांग कर राजेश अपने परिवार का पेट पाल रहा है।

पत्नी कुंदन देवी भी दिव्यांग है जिसे दस दिन पूर्व 1500 रुपये बतौर पेंशन की राशि मिली जो लिए गए कर्ज चुकाने में खर्च हो गए। अब एकबार फिर खाने की समस्या सामने आ गई। राजेश ने बताया कि नये नियम से पूर्व मिलने वाली पेंशन की राशि पंचायत स्तर पर मिल जाया करती थी, लेकिन नियम में बदलाव के बाद से राशि मिलनी बन्द हो गई। बिगत एक वर्ष से राशि के लिए वह चक्कर काट रहा है लेकिन कोई अधिकारी बात की तवज्जो नहीं दे रहा। इधर बीडीओ पिपरा अरविंद कुमार ने इस बाबत कहा कि राजेश से सम्बंधित मामला सामने आया है जिसे शीध्र निपटाने का प्रयास कर पेंशन की राशि मुहैया करवाई जाएगी।

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