सुपौल: सरकारी सिस्टम से परेशान होकर दिव्यांगों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार

प्रदीप जैन/सुपौल
सुपौल/बिहार:  सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलने से दुखी सुपौल जिले के पिपरा के दिव्यांगों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए योजनाओं के दायरे में लाने की मांग की है। जिससे परिवार का भरण पोषण हो सके। महेशपुर के राजेश पासवान को विगत आठ महीने से पेंशन की राशि नहीं मिल रही जबकि राजेश और उसकी पत्नी दोनों ही विकलांग है।

पैसे के अभाव में राजेश के घर पैदा हुए तीन बच्चे गरीबी का दंश झेलते हुए मर गए। काफी भाग दौड़ के बाद रिक्शा अवश्य दिया गया लेकिन आज भी पेंशन के चक्कर मे हाकिम के पास दौर लगाना राजेश की नियति बन चुकी है।

दीनापट्टी के फारुख की भी दिनचर्या कार्यालयों के चक्कर काटते गुजरती है। फारुख की उखड़ती सांसे इस बात की गवाह है कि पूरे परिवार के किसी भी सदस्य का नाम बीपीएल सूची में दर्ज नहीं है। भीख मांग कर हाथ आये पैसों से घर चला रहे फारुख ने बताया कि रिक्शा पाने के लिए उसे कलाई की नस काटनी पड़ी। जिसके बाद हरकत में आये पदाधिकारियों ने दूसरे ही दिन रिक्शा मुहैया करवा दिया। लेकिन फारुख की मांग है कि भीख मांग भाइयों से मिले पैसे से निर्मित शौचालय के अधूरे निर्माण में पैसे की आवश्यकता है। जिससे शौचालय बन पाए।

ऐसे ही अमहा के श्रवण की कहानी भी जुदा नहीं। गरीबी की जिल्लत ढोता परिवार की आर्थिक आमदनी की वजह से व्याह लायक बैठी बहन की शादी पैसों के अभाव में नहीं हो पा रही है। अलग बात है कि श्रवण के पिता का नाम अवश्य बीपीएल में दर्ज है। लेकिन इंदिरा आवास के लिए उसका परिवार आज भी बर्षो से चक्कर काट रहा है।

पढ़ाई में हमेशा अव्वल आने वाले श्रवण दोनों पैरों से लाचार है। रिक्शा के लिए श्रवण ने भी ऑफिस के काफी चक्कर लगाए लेकिन रिक्शा नहीं मिल सका। मजबूरन किसी भी कार्य के लिए श्रवण को लाठी के सहारे अपनी जरूरत पूरा करना पड़ता है। ऐसे कई और भी मामले हैं जिसमें पिपरा में मौजूद दिव्यांगों को सरकारी लाभ नहीं मिल पा रहा। बीडीओ अरविंद के मुताबिक जो भी बातें संज्ञान में आती हैं उसे हरसंभव मदद किया जा रहा है।

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