सुपौल: अवैध मजदूर निबंधन कार्यालय का भंडाफोड़, लोगो से होती थी अवैध वसूली

प्रदीप जैन/सुपौल

सुपौल/बिहार:  फर्जी तरीके से संचालित श्रम विभाग कार्यालय में बुधवार को एसडीओ त्रिवेनीगंज विनय कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम में शामिल कार्यपालक दंडाधिकारी त्रिबेनीगंज ने छापामारी कर कार्यालय से नकली मुहर, पासबुक, सैंकड़ों आवेदन सहित अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किये हैं। घटना त्रिवेनीगंज मुख्यालय स्थित मंगलबाजार की है, जहां रामू चौखानी के निजी आवास पर कुछ लोगों द्वारा इस गोरखधंधे को अंजाम दिया जा रहा था। इस दौरान कमरे में काम कर रहे दो लोगों को  पूछताछ के लिये हिरासत में लिया गया है।

पूरे प्रकरण में मास्टर माइंड रामदेव मेहता फरार है। जिसकी सरगर्मी से तलाश की जा रही है। अवैध वसूली का केंद्र बने कथित कार्यालय की भनक किसी को नहीं मिली बल्कि लोगों की शिकायत के बाद एसडीओ ने जब कथित कार्यालय की जांच की तो कहानी परत दर परत खुलती चली गई। एसडीओ के निर्देश के बाद श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सुशील कुमार यादव के लिखित शिकायत के बाद थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है। पकड़े गए लोगों में भूपेंद्र मेहता व रामू मेहता शामिल है।

पूरा मामला सन्निर्माण कर्मकार कल्याण से जुड़़ा है। जिसमें पूर्व से निबंधित लोगों को पंद्रह हजार रुपये बतौर सहायता सरकार दे रही है। लाभ उन लोगों को मिलेगा जिन्होंने वर्ष 14/15 में अपना नाम दर्ज कराया था। लेकिन रिनुअल के नाम पर सभी से दो हजार की राशि दलालों द्वारा अवैध कार्यालय खोल कर ली जा रही थी। निबंधित लोगों की संख्या त्रिबेनीगंज प्रखंड में तकरीबन हजारों की संख्या में है। जिन्हें झांसा देकर पैसे की वसूली की गई।

इस पूरे मामले में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सुशील कुमार की भूमिका भी संदेहास्पद बताई जा रही है। मंगलबजार स्थित जिस घर से फर्जी दस्तावेज जिसे अधिकारी बता रहे। उसी आवास में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी का रहना होता था। मामले का रोचक पहलू यह भी है कि श्रम प्रवर्तन पदाधिकरी त्रिबेनीगंज इससे पूर्व मुख्यालय से 50 मीटर की दूरी पर स्थित सवेरा विद्यालय के पास मौजूद एक निजी घर में कार्यालय बिगत 6 महीने से चलाते रहे। जहां इन सभी बिचौलियों का आना जाना लगा रहता था। मामले में सुशील कुमार की भूमिका को लेकर भी लोगों ने सवाल उठाए हैं। लाभुकों की मानें तो किसी लाभुक से एक हजार से लेकर दो हजार तक कि रकम दलालों के मार्फ़त ली गई। पिछड़ा क्षेत्र होने से मजदूरों को पता नहीं होता था कि निबन्धन के रिनुअल में मामूली रकम ली जाती है।

भोले भाले मजदूरों को झांसा देकर दलाल मोटी रकम वसूली का खेल खेलते रहे। लेकिन इसकी भनक एसडीओ कार्यालय जिसकी दूरी महज 50 मीटर होगी को पता नहीं चल पाना भी रहस्य बन गया है। श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी त्रिबेनीगंज सुशील कुमार यादव के जिम्मे किशनपुर त्रिबेनीगंज व छातापुर का कार्यभार है। इस प्रकरण में सुशील कुमार यादव का कहना है कि उन्हें फर्जी कार्यालय की जानकारी नहीं थी एसडीओ साहब के दिशा निर्देश के बाद सम्बंधित लोगो के बिरुद्ध रपट लिखाई गई है।

Loading...