सहरसा:शहर का एक मात्र पोस्टमार्टम हाउस की स्तिथि शहर के विकास को दिखा रहा आइना

गौतम कुमार/सहरसा
सहरसा/बिहार:एक तरफ जहां सहरसा के नेताओ द्वारा दावा किया जाता है कि सहरसा विकास की राह में है तो वही सहरसा के इस विकास में कई खामियां नजर आती है।सहरसा सदर पोस्टमार्टम हाउस की परिस्तिथियां सहरसा को विकास से कोषों दूर भेज देती है।

सहरसा का ये सदर पोस्टमार्टम हाउस पुरे जिले का इकलौता पोस्टमार्टम हाउस होने के बाद भी इसकी स्तिथि देननीय बनी हुई है।जहां गंदगी का बनी रहती है और साथ ही इसके गेट खिड़की और परिषर को की स्तिथि बेकार बनी हुई है।खिड़की पूरा टूट चुका है।गेट बेकार हो गयी है।परिषर में सुअरों का जमावड़ा लगा रहता है।और पक्का मकान से इसका को लेना देना ही नही है।ऐसे में अगर प्रशासन द्वारा विकास का दावा कितना प्रतिशत सही है वो आप बदहाल फोटो को देख अंदाज़ा लगा सकते है।

बाहर की स्तिथि तो देननीय है साथ ही अंदर की स्तिथि भी कुछ इसी प्रकार है।लेकिन दुखद बात तो ये है कि आज तक प्रशासन द्वारा इसके लिए कोई कदम नही उठाया गया।जिससे इसमें कभी सुधार हो नही पाया।

सहरसा स्थानीय निवासी वार्ड 9 के सामाजिक कार्यकर्ता मुकेश ठाकुर और सडीया के निवासी बाबाजी यादव ने बताया कि ये पोस्टमार्टम हाउस के मरम्मत व सफाई कार्य के लिये आज तक किसी भी प्रकार का क़दम नही उठाया गया और नाही इसके सुधार के लिए कभी बात किया गया।

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