सहरसा: महापंडित मण्डन मिश्र की याद में मण्डन समारोह का आयोजन

गौतम कुमार/सहरसा

सहरसा/बिहार:  सहरसा जिला के अंतर्गत महिषी की धरती जहां मण्डन मिश्र ने जन्म लिया और जिसके घर पर तोता भी संस्कृत में दर्शन पर वाद विवाद करते थे। अगर किसी राहगीर द्वारा मण्डन मिश्र का पता पूछा जाता था तो सभी का एक ही जवाब होता। जिस घर के दरवाजे पर पिंजरे में बंद तोता भी वेद के स्वतः प्रमाण या परतः प्रमाण की चर्चा कर रहा हो। उसे ही मण्डन मिश्र का घर समझना। आचार्य मण्डन मिश्र ने कई दर्शन ग्रन्थों समेत मीमांसा दर्शन के अन्य ग्रन्थ “ब्रह्म सिद्धि” की रचना की थी।जिसपर आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व चार-चार व्याख्या ग्रन्थों की रचना की गई।

किन्तु अति क्लिष्ट संस्कृत भाषा में टीका रहने के कारण लोकप्रसिद्ध नहीं हो पाई और आज भी “ब्रह्म सिद्धि” बड़े-बड़े दार्शनिकों-विद्वानों के लिए अबूझ पहेली ही रह गयी। उन्ही का याद में महिषी की पवित्र भूमि पर  27-3-18 को मंडन समारोह का आयोजन होने जा रहा है। साथ में महादेव का पूजा भी की जा रही है। आयोजनकर्ता श्री निशाकांत ठाकुर ,कोशी युवा  एकता मंच अथवा स्थानीय वासी द्वारा इस पर्व में महत्वपूर्ण सहयोग रहेगा।
शंकराचार्य गए थे उनके घर
कहा जाता है कि आदि शंकराचार्य ने मिथिला के महापंडित मंडन मिश्र का नाम और ज्ञान की ख्याति सुनी। वे उनके गांव जहां कुएं पर पानी भर रहीं महिलाएं संस्कृत में वार्तालाप कर रहीं थीं। शिष्य ने उनसे पूछा मंडन मिश्र का घर कहां है? उनमें से एक स्त्री ने बताया आगे चले जाइए। जिस दरवाजे पर तोते शास्त्रार्थ कर रहे हों, वही पं. मंडन मिश्र का घर होगा।

शंकराचार्य शिष्यों के साथ आगे बढ़े। बांस के झुरमुट, धान से लहलहाते खेत जैसे मनोरम दृश्य देखते बढ़ते महिषी गांव पहुंचे। मंडन मिश्र का घर खोजने में परेशानी नहीं हुई। एक घर के द्वार पर पिंजड़े में तोते शास्त्रार्थ कर रहे थे। शंकराचार्य ने जान लिया कि वही मंडन मिश्र का घर था। शंकराचार्य ने मण्डन मिश्र के सामने शास्त्रर्थ का प्रस्ताव रखा। हालांकि मण्डन मिश्र जी की हार हुयी । लेकिन मण्डन मिश्र की पत्नी भारती द्वारा  पूछे गए एक सवाल का ज़वाब न देने पर शंकराचार्य ने हार मान लिया था।

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