सहरसा:हटिया गाछी एस्कॉर्ट गली लॉज में चली गोली,छात्र घायल

गौतम कुमार/सहरसा
सहरसा/बिहार:कहते है युवा हमारे देश का भविष्य है देश और समाज को विकास की पटरी पर दौड़ाने में युवाओं की भागेदारी अहम होती हैं।ऐसे में हमारे बिहार का भविष्य पर काफी घना कोहरा छा रहा है।हमारे बिहार का भविष्य काली दुनिया में कदम रख रहे है।ऐसे में देश और समाज के लिए काफी चिंतनीय विषय पर एक सवाल बेहद अहम हैं।कि”हम और हमारा समाज कैसें सुधरेंगा”इस पर गौर फिक्र करने की जरूरत हैं,पर ऐसा नहीं हो रहा हैं।आज भी एक ऐसी घटना सामने आयी जो युवाओं के बर्बाद हो रहें भविष्य की बानगी पेश करती हैं।

सहरसा जिलें मुख्यालय सदर थाना क्षेत्र अंतर्गत हटिया गाछी एस्कॉर्ट गली लॉज में गोली चलने की घटना सामने आयी। जानकारी के मुताबिक घायल अनिल कुमार जो सुपौल जिलें का निवासी हैं,अनिल के पिता पेशे से किसान हैं।अनिल हटिया गाछी लॉज में रहकर बीए और कॉम्पिटिशन की तैयार करता हैं।लॉज में दोस्तों के साथ हथियार चलाने के सीखनें के क्रम में गोली चली जो उसके गर्दन को छूते निकल गयी महज चन्द मिनटों में ही अनिल खून से तर हो गया तब आनन फानन में लॉज के ही दो लड़कों के मदद से ही उसे सदर अस्पताल लाया गया जहाँ घायल का ईलाज चल रहा हैं।

पुलिस अस्पताल पहुँचकर घायल का फर्द बयान दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी हैं।मालूम हो कि इस घटना में हथियार चलाना सीख रहें और सीखा रहें दोषी हैं।घायल अनिल का भी जेल जाना तय हैं।और पुलिस आगें भी बयान के आधार पर लॉज के उन युवकों की खोजने की तलाश जारी रखें हुए हैं,जो इस घटना में संलिप्त हैं।समाज में अमूमन इस तरह के घटनाओं का बढ़ना युवाओं के लिए दुखद घड़ी हैं।माँ–बाप धूप बारिश में खेती मजदूरी कर गाँव से कोशो दूर पढ़ने के लिए भेजते हैं।खुद भूखे रहकर बच्चें के लिए निवाला के लिए दाना भेजते हैं।लेकिन आज के समय में ऐसी तस्वीर उन सभी माँ–बाप के आँखों में केवल आँसू ही नहीं देती हैं,बल्कि उनका कलेजा को भी चाक–चाक कर देती हैं।

उनका भी सपना होतो हैं,की हमारा औलाद देश और समाज के काम आवें जिससें हमारा नाम रौशन हो सकें।लेकिन अभी के समय में इन सपनों का कदर को कौन करता हैं।मौजूदा समय देखकर खुले सफे में कहने में हिचकिचाहट कैसी की अगर इस तस्वीर को जल्द से जल्द पटरी पर लाया नहीं गया तो देश समाज के साथ–साथ युवाओं का भविष्य जमींदोज होते देरी नहीं होगी।

आखरी में एक सवाल युवाओं के हाथ में कलम की जगह कैसें आती हैं,चमचमाते हथियार।पुलिस के लिए ये चुनौतियों से भरा टास्क हैं।सहरसा के सभी लॉज का करना होगा सर्च ऑपरेशन।बहुत सारें सूत्र का चल सकता हैं,पता।आखरी में हम तो बस इतना ही कहेंगे “हम सुधरेंगे तब देश सुधरेंगा”मतलब खुद को सुधारने के लिए खुद से बड़ा गुरु कोई नहीं होता।

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