सहरसा: आनंद मोहन की कथा गुदरी के लाल मांगन लाल पर गोष्टि का आयोजन

गौतम कुमार/सहरसा
सहरसा/बिहार:  रेड क्रास भवन में साहित्यिक संस्था राग- रंग के तत्वावधान में आयोजित गोष्ठी में मैथिली कवि व साहित्यकारों ने  एक ऐसे अजीम शख्सियत से वाकिब करवाया जो वंचित समाज में पैदा हुआ। गुरबत में पैदा लिया और फर्श से अर्श तक का सफर तय किया। पंचगछिया संगीत घराने के संरक्षक राय बहादुर लक्ष्मी नारायण सिंह खुद कुशल संगीतज्ञ व संगीत के मर्मज्ञ थे। उन्होंने इस प्रतिभा को पहचाना और तराशकर संगीत की दुनिया के बुलंदियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।पंचगछिया संगीत, साहित्य, खेल व स्वतंत्रता सेनानी की धरती है।
मैथिली में नए लेखक आनंद मोहन की कथा मिथिला दर्शन में प्रकाशित गुदरी के लाल मांगन लाल के बहाने साहित्यकारों व कवियों की जमघट हुई। डा. राम चैतन्य धीरज की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि साहित्य विवकेशीलता की धारा होती है और यह धारा समय के साथ बदलती रहती है लेकिन मानवीय धारा नहीं बदलती है। इसी धारा में कोसी में साहित्य का समाकाल दिखाई देता है। सर्वहारा को केंद्र में हिंदी के जाने- माने साहित्यकार आनंद मोहन मैथिली में लिखना प्रारंभ किया है जो समकालीन मैथिली साहित्य को समृद्ध किया।
इस दौरान युवा नेता चेतन आनंद ने कहा कि एक अंग्रेज को अपनी पत्नी की हत्या के आरोप में जेल जाना पड़ा तो उसने आत्महत्या कर ली। लेकिन मेरे पिता निर्दोष होते हुए निरंतर लेखन कार्य से जुड़े हुए हैं। जिसका मन व मस्तिष्क मजबूत होता है वही व्यक्ति कलम के सहारे यह कर सकता है। कामरेड ओमप्रकाश ने कहा कि हर क्रांति कलम से शुरू हुई संपूर्ण हुई। चट्टान जुर्म की कलम चली तो चूर्ण हुई, हम कलम चलाकर त्रास बदलने वाले हैं हम तो कवि हैं इतिहास बदलने वाले हैं।
डा. केसी झा ने कहा कि गर कलम न छीनी गयी तो इतिहास बदलकर मानूंगा, इंसान तो क्या भगवान बदलकर मानूंगा। इस चर्चा में सुपौल से तारानंद झा तरूण, मधेपुरा से सिहेंश्वर कश्यप, विनय चौधरी, शंभूनाथ अरूणाभ, रंजीत कुमार सिंह, ई. रमेश, अजय कुमार सिंह, मुख्तार आलम, आनंद कुमार झा, राम कुमार सिंह, आनंद नाथ झा, नन्हे सिंह, मुकुल आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन डा. कृष्ण मोहन ठाकुर ने किया।
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