सहरसा: शिवेंद्र को अपनी बेटी से मिलने से क्यों रोका जा रहा है ?

गौतम कुमार/सहरसा
सहरसा/बिहार:  आकांक्षा अनाथ आश्रम के संचालक शिवेंद्र कुमार न्याय की गुहार लगाते लगाते थक गए। शिवेंद्र का आरोप है कि पिछले सात महीने से उन्हें उनकी बेटी से मिलने नहीं दिया जा रहा है और ना ही बात करने दिया जा रहा है। वो किस हालत में इसके बारे में भी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। बालिका गृह पुर्णिया में रह रही अपनी बेटी से फोन पर बात करने की जब भी शिवेंद्र कोशिश करते हैं तो उन्हें ऊपरवाले अधिकारी की मंजूरी लेकर आने के लिए कहा जाता है। शिवेंद्र कुमार का आरोप है कि हमारे द्वारा अनाथ आश्रम (आकांक्षा अनाथ आश्रम) चलाया जा रहा था। जिसे जिलाधिकारी द्वारा बंद करवा दिया गया और यहां तक की आश्रम के बच्चों सहित उनकी अपनी बेटी को भी बालिका गृह पूर्णिया भेज दिया गया।

शिवेंद्र का ये आरोप भी है कि जब भी वो अपनी बेटी से बात करना या मिलना चाहते हैं तो उन्हें मिलने नहीं दिया जाता है और ना ही बात करने दिया जाता है। जवाब में यही कहा जाता है कि मुझे ऊपर से मना किया गया है। बच्ची से बात करने से पहले डीसीपीओ का आर्डर लाओ। उन्होंने बताया कि सितम्बर 2017 में अनाथ आश्रम पर गलत आरोप लगा कर बंद करवा दिया गया । शिवेंद्र का आरोप है कि तमाम अलाधिकार और पुलिस बल के साथ सील कर उनकी बेटी सहित 9 बच्चे को जबरन मारपीट कर ले गए।

ऐसे मासूम बच्चों से नहीं मिलने दिया जा रहा उनके पिता सामान शिवेंद्र कुमार को

बेल पर छूटने के बाद घटना से सम्बंधित सूचना के अधिकार के तहत 11 प्रश्न प्रपत्र ‘क’ के रूप में पूछा गया। जिसका जवाब आज तक जिलाअधिकारी द्वारा नहीं दिया गया। इस प्रपत्र से बौखलाकर संचालक के गैर हाज़री में आकर साक्ष्य छुपाने हेतु गेट सील कर दिया। और वहां से अभिलेख और 50 हज़ार नगद लेकर चले गए ।

दम्पति जब पुलिस के पास पहुंचे तो कोई इस घटना पर कुछ करने को राजी नहीं था। अंततः उन्होंने उच्च न्यायालय में आपराधिक केस  183/18  दायर किया। जिसके बाद जिला अधिकारी द्वारा कोई साक्ष्य नहीं प्रस्तुत किया गया। लेकिन फिर भी आज शिवेंद्र न्याय की आस में भटक रहे हैं, और अपनी ही बेटी से उन्हें बात नहीं करने दिया जा रहा है।

शिवेंद्र इस मामले में अब सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। वहीं इसका एक दूसरा पहलू भी है। जिसमें प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि जिस आकांक्षा अनाथ आश्रम को शिवेंद्र चला रहे थे उसमें रहनेवाले बच्चों के लिए सही इंतजाम नहीं किये गए थे। उनकी पढ़ाई की व्यवस्था भी सही नहीं थी। जांच में ये बात भी सामने आई थी कि इनके अनाथ आश्रम में जो बच्चे रह रहे थे वो काफी कमजोर हो चुके थे। क्योंकि उनके खान पान का सही इंतजाम नहीं था।

एक दस्तावेज में इस बात का भी जिक्र है कि शिवेंद्र 0-6 साल तक के बच्चों को आश्रम में लाने के 72 घंटे के भीतर उसके बारे में राज्य स्तरीय समाचार पत्र में जानकारी प्रकाशित की जानी होती है, लेकिन इसकी भी अनदेखी की गई। जांच रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई थी कि आश्रम में एक ही कमरे में लड़के, लड़की और महिलाएं रहती हुई पाई गईं।

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