पूर्णिया: उर्स में शामिल होने जान जोखिम में डालकर पहुंचे 30 हजार लोग

नीरज झा/पूर्णिया
पूर्णिया/बिहार:  जिले के बायसी अनुमंडल अतंर्गत तराबाडी  पंचायत के ताराबाड़ी ग्राम में शोफीशाह हजरत मौलाना तफैज्जूल हूसैन राशिदी रहमतुल्ला आलेह की याद में सलाना उर्स का आयोजन किया गया। एक दिवसीय उर्स मेला में के अवसर पर जलसा का आयोजन किया गया। जलसा में बाहर के मौलाना एवं मुफ्ति के साथ कई मोलवियों ने भाग लिया। दिन के दो बजे उत्तर टोला ताराबाड़ी मास्टर मुक्तार के घर से डाला उठाया गया। करीब ढ़ाई बजे से कुलरवानी की मजार पर हजारों की संख्या में लोगों ने चादरपोशी की।
मौके पर कमेटी के मो. जहांगीर अशरफ ने बताया कि हर वर्ष के तीन मार्च को उर्स का आयोजन किया जाता है। यहां जिले से बाहर  के लोग चादरपोशी करने के लिए आते हैं, और मन्नते मांगते है। मौके पर डॉ प्रभात रंजन पहुंचकर उर्स के मजार पर चादर चढ़ाया। कमेटी के मो. जूबेर आलम, मास्टर मुक्तार अहमद, अरसद जमाल, आलहाज मो. हासीम, हाफिज शमसुजोहा, मुंशी मुस्ताख,मास्टर नवाज अहमद, शहनबाज असरफ, गुलाम हसनैन, मंजूर अशरफ, हसन मंजर अशरफ ने बताया दूर दराज के यहां मन्नते मांगने आते है, और उनकी मन्नते पूरी होती है।
जान जोखिम में डालकर उर्स में पहुंचे लोग
लेकिन गांव में पुल नहीं होने के कारण लोगों को काफी दिक्कत का समाना करना पड़ता है। वहीं गांव की आबादी 30 हजार के करीब है। साथ इस आयोजन में लोगों की संख्या 50 हजार के पहुंच जाती है। पुल नहीं होने के कारण कई लोग नदी तैरकर चादरपोशी करने के लिए पहुंचे। पूर्व मुखिया जहांगीर ने बताया आजादी के बाद से अब तक लोगों को इस नांव का ही यातायात का एक मात्र सहारा है। कई बार पुल बनाने को लेकर आवेदन भी दिया गया। यहां के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों को आवागमन करने में परेशानी होती है।
30 हजार लोगों पर मात्र एक नाव
ताराबाड़ी पंचायत से सौपाड़ा पंचयात को महानंदा नदी अलग करती है। ताराबाड़ी पंचायत की आबादी लगभग 30 हजार है। वहीं इस बड़े आयोजन में एक दिन में 50 हजार लोग जुटते है। पूर्व मुखिया जहांगीर ने बताया कि आजादी के बाद से आज तक इस नदी पर पुल का निर्माण नहीं हुआ है। इसके लिए आवेदन भी दिया गया। लेकिन कुछ नहीं हुआ। वहीं नदी पार करने के लिए एक ही नाव है।  वहीं नाव चालक भी कभी कभी नहीं रहता है। उस समय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। नदी में पानी कम रहने पर लोग तैर या चल कर उस पार हो जाते है। लेकिन जब नदी में पानी बढ़ जाता है तब काफी परेशानी होती है। इस तरह के आयोजन के समय तो और भी परेशानी होती है।
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