पूर्णिया यूनिवर्सिटी A ग्रेड से पास, एक अप्रैल से हो सकता है सत्र शुरु

पूर्णिया यूनिवर्सिटी A ग्रेड से पास, एक अप्रैल से हो सकता है सत्र शुरु

नीरज झा/ पूर्णिया
पूर्णिया/बिहार:   एक अप्रैल से पूर्णिया विश्वविद्यालय का सत्र शुरु हो सकता है। अपने दो दिवसीय स्थल निरीक्षण दौरे पर डॉ खालीद मिर्जा, निदेशक उच्च शिक्षा बिहार के नेतृत्व में मनोज कुमार ,अध्यक्ष बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड व डॉ नरेंद्र श्रीवास्तव, कुल सचिव, बीएनएमयू ने प्रेस वार्ता में कही। डॉ खालीद मिर्जा ने मजाकिया अंदाज में यहां तक कहा कि मै मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ फीता काटने भी आउंगा।
डॉ मिर्जा व उनकी टीम 31 जनवरी की सुबह 08ः30 बजे पूर्णिया कॉलेज पूर्णिया के परिसर में आ चुकी थी। उनका स्वागत कॉलेज प्रचार्य डॉ संजीव कुमार ने किया।  उसके बाद टीम कॉलेज परिसर के 15 डिपार्टमेंट का गहन निरीक्षण किया। जिसमें बीसीए लैब, इग्नू भवन, एनसीसी, ऑडिटोरियम, कॉमर्स , मैथिली, इतिहास, साइंस लैब के साथ कॉलेज के सभी लैब का को बड़ी बारिकी से देखा। इस सभी व्यवस्था को देख कर वो आर्श्चयचकित हो गए। कहा ऐसी व्यवस्था मैनें कही नहीं देखी। उसके बाद विश्वविद्यालय कार्यालय के लिए परीक्षा भवन का निरीक्षण किया और कहा की पाटलीपुत्र व मुंगेर की तुलना में यह सबसे बेहतर है।
मुंगेर में तो सिर्फ दो ही तल का भवन दिया है, पर आपने तो तीनों भवन दिया है मै इसकी प्रशंसा करता हूं। पूर्णिया कॉलेज के पास काफी भूसंपदा है। इस दौरान कॉलेज के शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मचारी मौजूद रहे। निरीक्षण होने के बाद दोपहर 12ः30  बजे के बाद टीम सर्किट हाउस वापस चली गई थी।
इन चीजों की रही चर्चा
पूर्णिया कॉलेज का साइंस लैब पटना साइंस कॉलेज से बेहतर, कैंपस काफी बड़ा व बढ़िया, सभी विषयों का अलग-अलग ऑफिस, कॉलेज के पास पर्याप्त भवन, कॉलेज की में एनसीसी विंग की तारीफ, गांधी जी की प्रतिमा, कुशल व्यवहार से जीता दिल, छात्रावास की जर्जर हालात पर डीपीआर प्रस्तुत करने का सलाह देना,विश्वविद्यालय के लिए बाउंड्रीवाल होना जरुरी
आठ फरवरी को संभवतः हो सकती है घोषणा
कयास लगाया जा रहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  प्रमंडलीय बैठक को लेकर आठ फरवरी को पूर्णिया आ सकते हैं। उसमें पूर्णिया विश्वविद्यालय की घोषणा हो जाये। वहीं डॉ मिर्जा ने कहा कि सरकार एक अप्रैल 2018 से नये विश्वविद्यालय में सत्र शुरु करने को लेकर काफी गंभीर है।
‘सोचा था पूर्णिया कैसा होगा’
पूर्णिया आने से पहले सोचा कि यहां क्या रखा है। बहुत सोच रहा था कि कैसी जगह होगी। लेकिन अब सोच रहा हूं कि क्यों जा रहा हूं। यहां पर बहुत संभावना है। मैने आज पहली बार गांधी जी को माल्यापर्णन किया है।
कर्मचारी बंटबारे पर रहे चुप रहे
बीएनएमयू से पूर्णिया विश्वविद्यालय बनने के बाद कर्मचारियों को लेकर कई कयास लगाये जा रहै है कि कौन कहां रहेगा। इस सवाल पर उन्होंने कहा कि ये तो उनलोगों पर निर्भर करता है। मैं कुछ नहीं कह सकता हूं।
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