पूर्णिया यूनिवर्सिटी के लिए छात्रों ने किया था बूट पॉलिश, अब फाइनल घोषणा की मांग

नीरज झा/पूर्णिया
पूर्णिया/बिहार:  विश्वविद्यालय बनने के बाद टीम पहली बार पूर्णिया कॉलेज पूर्णिया के निरीक्षण कर चुकी है । तीन सदस्यीय टीम कॉलेज परिसर में स्थित परीक्षा भवन का निरीक्षण किया है । लेकिन पूर्णिया कॉलेज पूर्णिया से विश्वविद्यालय बनने का सफर आसान नहीं था। बात 2010 से  है जब विश्वविद्यालय के लिए संघर्ष मोर्चा का गठन किया गया। जिसका नाम विश्वविद्यालय निर्माण संघर्ष मोर्चा रखा गया। डॉ इश्तियाक अहमद इसके अगुवा बने। डॉ अहमद ने उन दिनों को याद करते हुये कहा कि विश्वविद्यालय का जब सपना देखा गया तो बहुत से लोगों ने मजाक बनाया।
लेकिन अब यह मजाक अब  हकीकत का रुप ले रहा है। बात 2013 की है जब विश्वविद्यालय की मांग को लेकर पूर्णिया कॉलेज के शिक्षक, छात्र नेता व बुद्धिजीवी वर्ग ने कमर कस ली।  इसके लिए आर-पार की लड़ाई के लिए सब तैयार हो गए। 2015 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार संकल्प रैली को लेकर पूर्णिया आने वाले थे। इस मौका को सभी लोग भुनाना चाहते थे। छात्रों ने मुख्यमंत्री के काफीले को रोका। तब मुख्यमंत्री ने पूछा क्या चाहते हो। तो छात्रों ने कहा कि विश्वविद्यालय। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया। उस वक्त लोगों को लगा कि आश्वासन का क्या है यह तो किसी भी को दिया जा सकता है। लेकिन इसके बाद भी विश्वविद्यालय का सपना साकार नहीं हुआ।
छात्र नेता राजेश यादव, जिन्हें नजरबंद किया गया था
इसके बाद 13 जून 2016 को मुख्यमंत्री प्रमंडलीय समीक्षा बैठक के लिए पूर्णिया आने वाले थे। और इस बार दो दिन तक यहां रहने वाले थे। तो यह सबसे अच्छा मौका था। इसके लिए समाजसेवी विजय श्रीवास्तव के साथ अन्य लोगों की मीटिंग उनके ऑफिस में हुई। साथ पॉलिटिकल लोगों की भी पैरवी की गई। साथ ही हैंडविल भी पूर्णिया में विश्वविद्यालय  क्यों नाम से छपवा कर लोगों को दिया गया कि सीएम तक यह संदेश पहुंचे  की अब आश्वासन और नहीं घोषणा कीजिए साहब।
जांच टीम के सदस्य
डॉ खालीद मिर्जा, निदेशक उच्च शिक्षा, बिहार के नेतृत्व में मनोज कुमार ,अध्यक्ष बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड व डॉ नरेंद्र श्रीवास्तव, कुल सचिव, बीएनएमयू के नेतृत्व में स्थल निरीक्षण करवाया जा चुका है  कि विश्वविद्यालय के लिए क्या जरुरत है। इसके बाद विश्वविद्यालय में कितना खर्च आयेगा। पूर्णिया विश्वविद्यालय को पहले ही बिहार विधान सभा पारित कर दिया गया है।
बूट पॉलिस कर मुख्यमंत्री को दिखाया था आईना
तब उस समय के छात्र नेता आलोक राज के साथ अन्य 20छात्रों ने आम जनों का बूट पॉलिस कर सीएम नीतीश कुमार यह संदेश देना चाहते थे कि अगर विश्वविद्यालय नहीं होगा तो यहां के छात्रों का यही हाल होगा।
नजरबंद कर दिया गया था
तब के छात्र नेता राजेश यादव ने कहा कि इसके लिए वह कई वर्षों तक प्रयास किया। 2011 के विधायक स्व. राज किशोर केशरी के घर का घेराव, हस्ताक्षर अभियान, मंत्री नरेंद्र यादव, शिक्षा मंत्री पीके शाही, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार,पूर्व सीएम जीतन राम मांझी तक को चिट्ठी लिखी। उसके बाद सीएम नीतीश कुमार की यात्रा पूर्णिया में होने वाली थी लेकिन ऐन मौके पर मुझे नजरबंद कर दिया गया था ताकि मै आवाज नहीं उठा संकू।
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