पूर्णिया में कचरे के अंबार के सामने बौना हो गया नगर निगम

पूर्णिया में कचरे के अंबार के सामने बौना हो गया नगर निगम

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार:  पूर्णिया के ग्रामीण क्षेत्रों के साथ साथ शहरी क्षेत्रों में सॉलिड वेस्ट के निबटान की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है। नगर निगम क्षेत्र में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नाम पर दो सालों से महज खानापूर्ति ही की जा रही है। शहर की मुख्य सड़कों व बाजार समेत विभिन्न वार्डों से निकलने वाले ठोस कचरे को उठाया तो जाता है लेकिन इसके प्रबंधन की कोई व्यवस्था नगर निगम के पास नहीं है।

हालांकि वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए प्रस्तुत किए गए नगर निगम के बजट में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर चर्चा की गई लेकिन अबतक यूनिट स्थापित किए जाने का कोई मास्टर प्लान तय नहीं किया गया है। लिहाजा, नगर निगम के सफाईकर्मियों द्वारा ठोस कचरे को शहर के ही बाहरी हिस्से में डंप कर दिया जाता है। जहां से गुजरना आमतौर राहगीरों के लिए काफी कठिन होता है और उन्हें अपने नाक पर रूमाल रखकर ही गुजरना पड़ता है। हालांकि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए बोर्ड बैठक में भी सहमति बनी थी लेकिन अबतक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ठोस कचरा को आमतौर पर कप्तान पुल के नीचे डंप कर दिया जाता है और उसमें लगाई गई आग लोगों के लिए किसी आफत से कम नहीं है।

सिर्फ डोर टू डोर कलेक्शन से नहीं बनेगी बात
समाजसेवी विजय श्रीवास्तव कहते हैं कि नगर निगम द्वारा भले ही शहर में साफ सफाई की मुकम्मल व्यवस्था को ले कर डोर टू डोर वेस्ट कलेक्शन योजना का क्रियान्वयन तो कर दिया गया लेकिन ठोस कचरे के निपटान की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। लिहाजा, पूर्व की तरह वर्तमान में भी ठोस कचरे को कहीं या तो फेंक दिया जाता है या फिर जमीन के नीचे गाड़ दिया जाता है। ऐसे में जहां वायु, मिट्टी व जल के प्रदूषित होने का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

कचरे के आगे बेबस नगर निगम पर शिक्षक संजय झा कहते हैं कि नगर निगम को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के नाम पर खानापूर्ति के बजाए अधिक संवेदनशील होने की जरूरत है ताकि शहर के ठोस कचरे के निबटान के साथ साथ पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि पॉलीथीन के अधिक इस्तेमाल पर भी आमजनों को विचार करने की जरूरत है।

कचरे से भरी पूर्णिया की नालियां

आमतौर पर लोग मार्केटिंग करने झोला लेकर नहीं जाते हैं और दुकानदारों से पॉलीथिन की मांग करते हैं। इस्तेमाल के बाद इस पॉलीथिन को लोगों द्वारा सड़कों पर फेंक दिया जाता है। जो हर लिहाज से खतरनाक साबित होता है। मसलन गंदगी तो फैलती ही है साथ ही नाली जाम होने का सबसे प्रमुख कारक पॉलीथीन ही है। इसे नगर निगम के मुख्य सफाई निरीक्षक कैलाश सिंह भी स्वीकारते हैं। कैलाश सिंह कहते हैं कि शहर को साफ सुथरा रखने में आमजनों का भी सहयोग अपेक्षित है। लेकिन दुकानदारों व आमजनों द्वारा पॉलीथीन के इस्तेमाल के बाद इसे सही जगहों पर न फेंककर सड़कों पर ही फेंक दिया जाता है।

नाली जाम होने की मुख्य वजह प्लास्टिक ही है
आमतौर पर बरसात के दिनों शहर के नाले उफनते रहते हैं और इसका मुख्य कारण नालियों में भरी गंदगी होती है। जिसमें अधिकांश प्लास्टिक की मात्रा होती है। इन प्लास्टिक का सही तरीके से निपटान नहीं होने के कारण नालियां जाम हो जाती हैं और नाले का गंदा पानी बाहर निकलने लगता है। बता दें कि शहर के अधिकांश नालों का यही हाल है और ठोस कचरा को नाले में फेंक दिए जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

कवायद जारी है होंगे कामयाब’ 
पूर्णिया नगर निगम की मेयर विभा कुमारी बताती हैं शहर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर कवायद जारी है। जमीन की तलाश जारी है और फिलहाल पूर्णिया सिटी में दो एकड़ जमीन तो उपलब्ध है लेकिन यह नाकाफी है। क्योंकि कम से कम 8 एकड़ जमीन की जरुरत है। जिसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही इस दिशा में कामयाबी मिलेगी।

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