पुर्णिया: रंगमंच पर कलाकार तो हैं लेकिन उनकी कला को देखने वाला कोई नहीं

नीरज झा/पुर्णिया
पुर्णिया/बिहार:  अपने ही जिले में सौतेला व्यवहार से दुखी हैं कलाकार, खुद के चंदे पर जीवित है रंगमंच व कलाकार। सोशल नेटवर्किंग के जमाने में आज कल हर कोई स्टार बन जाता है। और तो और  किसी भी वीडियो को इतना शेयर किया जाता है कि वह व्यक्ति खुद ही स्टार बन जाता है। उसके बाद उसकी पूछ और कमाई भी बढ़ जाती है। ठीक इसके उलट थिएटर आज भी अपने खेवनहार की आस में टकटकी लागाये बैठा है। न युवाओं को इसमें दिलचस्पी है और न हमारी सरकार को।
मानो लगता है अपनों के बीच में ही सौताला बन गया है ये थियेटर। थिएटर आज भी उन रंगकर्मियों के बदौलत जिंदा है जो मानते है कि उनका भी वक्त आयेगा। और लोग टिकट खरीदकर उनके कला को प्रोत्साहित करने के साथ उनकी हौसला अफजाई करते नजर आयेंगे। पर वक्त लगेगा सोच को बदलने में।
सोच बदलने की जरुरत है
पेशे से टेक्शेसन का काम करने वाले व कलाकार शिवाजी राय का कहना है जब बचपन में बच्चे स्कूल में कोई प्रोग्राम में परफार्मेंस देते हैं तो अभिभावक खुश हो जाते हैं। इतना ही नहीं अगर पैसा खर्च होता है तो वो भी देते हैं। लेकिन जब वही बच्चा रंगकर्मी बनना चाहता है तो कोई भी अभिभावक प्ले देखने तक नहीं आते हैं। तब बहुत बुरा लगता है। हमें सोच बदलने की जरुरत है। तब ही थिएटर में बदलाव आयेगा।
पूरी तरह से अव्यवस्थित है
कलाकार गरिमा सिंह बताती है कि थिएटर पूरी तरह से अव्यवस्थित है। बहुत ही जर्जर हालात में है। कोई आर्थिक मदद नहीं मिलती है। खुद के कलेक्शन पर शो आयोजित किया जाता है। लोगों तक हम जुड़ नहीं पा रहे हैं या लोग हम तक नहीं जुड़़ पा रहे हैं।
व्यवसायिकरण का भी दौड़ आएगा
निर्देशक अंजनी श्रीवास्तव का कहना है कि इस बार हमलोगों का विश्व रंगमंच दिवस पर लगभग पांच लाख रुपये का वजट है। इसकी भरपाई हमलोग खुद से करते हैं। कोई हमलोगों की मदद नहीं करता। वहीं अपने शहर में हमलोग खुद को अजनवी पाते है। लोग थिएटर में मुफ्त में भी शो देखने नहीं आते है। जब कि शहर में अन्य कलाकारों के शो को देखने के लिए 1-2 हजार की टिकट भी खरीद लेते है। उस समय बहुत दुःख होता है। लेकिन हमलोगों ने हिम्मत नहीं हारा है बदलाव आयेगा और लोग टिकट खरीद कर हमलोगों का शो भी देखेंगे।
पूर्णिया के रंगकर्मी जो बॉलिवुड में कर रहे धमाल
पूर्णिया के अमित झा, प्रियदर्शी व रवि भूषण भारती, संतोष शिवम, अजय आनंद, जैसे कलाकार पूर्णिया की इसी रंगमंच के कलाकार है। आज ये बॉलिवुड में धमाल मचा रहे हैं। सावधान इंडिया, पान सिंह तोमर, दबंग-2, सिंकदर और पोरस, अशोका व बुलेट राजा जैसी फिल्मों में अदाकारी के साथ मेकअप मेन के तौर पर खुद को स्थापित कर चुके है।
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