पुर्णिया: फीस के पैसे नहीं थे, देवेश ने मम्मी-पापा को Sorry बोलकर खुदकुशी कर ली

प्रियांशु आनंद/पुर्णिया

पुर्णिया/बिहार: अज़मत पॉलीटेक्निक कॉलेज किशनगंज में बड़े ख्वाब लेकर सीतामढ़ी से किशनगंज गया था देवेश कुमार। उम्र बहुत छोटी थी, महज 19 साल। लेकिन इस छोटी सी उम्र में उसने बड़ी लड़ाई लड़ी। देवेश ने लड़ाई लड़ी मुफलिसी से, देवेश ने लड़ाई लड़ी बेरुखी से, देवेश ने लड़ाई लड़ी सरकार के उस सिस्टम से जिसकी कंटीली रस्सी से बुने जाल ने देवेश की जिंदगी को इस कदर उलझा दिया था कि उसे सुलझाने में उसकी जिंदगी इतनी उलझ गई कि दो मीटर के फंदे में लटकर अपनी जिंदगी को विराम देने का फैसला कर लिया देवेश ने। अज़मत पॉलीटेक्निक कॉलेज किशनगंज की पढ़ाई में कुछ बनने की उम्मीद कम थी इसलिए पुर्णिया आकर पढ़ाई करने लगा।

जिस कमरे में देवेश ने सर्वपल्ली राधाकृष्णण को अपने सिरहाने आदर्श पुरुष के रूप में सजा कर रखा था, उन्हीं की तस्वीर के सामने देवेश ने ये कहते हुए अपने प्राण त्याग दिये कि बस अब और नहीं चला जाता। अज़मत पॉलीटेक्निक कॉलेज में जिंदगी इतनी बेरंग हो जाएगी और कॉलेज प्रशासन इतना बेगैरत हो जाएगा इसका अंदाजा सीतामढ़ी में नहीं लगाया था देवेश ने।

जिंदगी के ठोकर को बखूबी झेल रहा था देवेश लेकिन कॉलेज के रजिस्ट्रान ने उसके जमीर को झकझोर दिया था। पतझड़ के बाद पेड़ की डालियां भी उतनी बेरौनक नहीं दिखती जितनी बेमुरव्वत, जिंदगी के मायने देवेश के लिए हो गए थे। वो नहीं बर्दाश्त कर सकता था कोई उसके पिता को फीस के लिए धमकी दे, देवेश अपने पिता के आंखों की लाचारी को गिरवी रखकर अपने ख्वाब नहीं पूरे करना चाहता था, देवेश अपनी मां को उस आंचल में अपनी मजबूरियों की सौगात नहीं सजाना चाहता था, इसलिए देवेश ने पुर्णिया में मधुबनी के शिवधाम कॉलोनी के उस लॉज की छत से लटककर अपनी जिंदगी खत्म कर ली। लेकिन याद रखिये देवेश मरा नहीं उसे मारा गया है। उसे मारा है उस संगदिल इंसानी सोच ने जिसके आंखों में देवेश की गरीबी इस चकाचौंध दुनिया में काली छाया महसूस होती थी।

देवेश इंजीनियर तो नहीं बन सका लेकिन उसने आखिरी बार जब कलम उठाया तो धृतराष्ट्र के राज में सजी मंत्रियों की मंडली को नंगा करके रख दिया। उन बुझदिलों की कायरता को उसने सफेद कागज के उस एक पन्ने में समेट दिया जिसे संविधान की भाषा में सुसाइड नोट कहते हैं।

देवेश ने अपने सुसाइड नोट में लिखा

देवेश के कमरे से मिला सुसाउड नोट

मैं देवेश कुमार पूरे होश हवास में लिख रहा हूं

मैं आज मरने जा रहा हूं। इसका कारण हैं मेरे कॉलेज के रजिस्ट्रार सर। वो मुझे फर्स्ट सेमेस्टर से धमका रहे हैं कि मैं तुम्हारा लाइफ बर्बाद कर दूंगा। तुमको प्रैक्टिकल में नंबर कम दूंगा। और फोर्थ सेमेस्टर में तो कम नंबर दिये और अब मेरे पापा को डरा रहे हैं कि इसको कॉलेज से निकाल दूंगा। लाइफ बर्बाद कर दूंगा। फीस जमा करने के लिए दबाव बना रहे हैं। मैं उनकी परेशानी से तंग आ गया हूं। वो बिना मतलब के तंग करते हैं। कॉलेज में टीचर नहीं है जो ठीक से पढ़ा सके। मैं पूर्णिया आकर पढ़ रहा हूं तो मुझे बहुत ज्यादा धमकी दे रहे हैं। मैं उनसे इतना परेशान हो गया हूं कि मेरे पास कोई और रास्ता नहीं सिवाय इसके।

सॉरी पापा…सॉरी मम्मी…आई लव यू दीदी…। मैं तुमको कितना चाहता हूं ये तुम कभी सोच ना सके। मां आप रोना नहीं मेरा साथ इतना ही था।

देवेश कुमार

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