दिल्ली चले पूर्णिया के श्याम नाथ, DU के छात्रों को पढ़ाएंगे कानून की किताब

नीरज झा/पूर्णिया
पूर्णिया/बिहार:  रात के ठीक 11 बजे एक नंबर से अमित रंजन को फोन आया। दोस्त श्याम बोल रहा हूं। बिहार सिविल जज के बाद अब दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के पद भी मेरा चयन हो गया है। वो खुशी शायद ही शब्दों में बयां की जाये। एक साधारण परिवार का साधारण सा लड़का जब असाधारण काम कर दे तो शायद वो क्षण बहुत सुखद होता है।
हो क्यों नहीं, जब दो महीने के अंतराल में दो बड़ी सफलता हो तो। पहला बिहार ज्यूडिशियल सर्विस परीक्षा में व दूसरा दिल्ली यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर में चयन होना। शायद किसी के लिए साधारण बात होगी। लेकिन दोनों पद रेणु की धरती से निकला है। सफर आसान नहीं था।
2007 में पीसीएस की तैयारी करने के लिए जोगबनी से पटना निकले हुए शख्स को शायद नहीं पता था कि उसकी मंजिल कहीं और है। बस क्या था, इलाहाबाद व बीएचयू में एलएलबी इंट्रांस का फॉर्म भरा। और चयन भी हुआ। जैसे ही महानामा(बीएचयू) की धरती पर पहूंचा तो पूछा गया क्या बनाना चाहते हो, वकील या जज। जबाव आया जज। लेकिन इसके पीछे 10 वर्षों की कठीन तपस्या थी। इसी का नतीजा है दिल्ली विश्वविद्यालय में असिसटेंट प्रोफेसर(लॉ फेल्कटी) में चयन होना। वो भी बिहार से अकेला शख्स होना। श्याम नाथ बताते है कि मेरे पिता विजयशंकर साह व दादा सज्जन साह की तपस्या और मां राजकुमारी देवी व भाई रामनाथ साह के संस्कार व आशीर्वाद के कारण ही मै इस मुकाम पर पहूंचा हूं। वहीं बहन पुनम व जीजा संजय प्रसाद भी इस सफलता से बहुत खुश है।
भविष्य बदल सकते है छात्र
श्याम नाथ बताते है कि छात्र अपना भविष्य खुद बदल सकते है। गरीबी व परिवार का स्तर कोई मायने नहीं रखता है। छात्र जिस दिन चाह ले उसी दिन उसकी भविष्य लिखी जा सकती है। बस खुद को समय दें। उसके बाद जो सफलता मिलती है न, उसको शब्दों में बयां नहीं कर सकते। सपनों को जीना चाहिए।
सफरनामा
2011 में बीएचयू से एलएलबी, 2013 में एलएलएम, 2012 में नेट व जेआरएफ, 2013 में एआईबीई की परीक्षा पास, 2013 में पीएचडी में एडमिशन, 2017 में बिहार ज्यूडिशियल सर्विस में चयन व डीयू में असिस्टेंट प्रोफेसर(लॉ फेक्लटी) में चयन, चाईल्ड ट्रेफिकिंग(नेशनल व इंटरनेशनल लीगल स्टेंड) नाम से किताब व 17 आर्टिकल (यूजीसी रिकोकनाइज्ड जर्नल) लिख चुके है।
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