बिहार के इस स्कूल में शिक्षक ज्यादा हैं छात्र कम, ससुर-दामाद ने बेड़ागर्क कर दिया

बिहार के इस स्कूल में शिक्षक ज्यादा हैं छात्र कम, ससुर-दामाद ने बेड़ागर्क कर दिया

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार:  डगरूआ प्रखंड क्षेत्र के मजगमा पंचायत अंतर्गत राजकीयकृत उच्च माध्यमिक विद्यालय कन्हरिया में शिक्षा अब सिर्फ नाम का रह गया है। बताया जाता है कि शिक्षा का स्तर इस कदर नीचे गिर चुका है कि सरकारी स्कूल में शिक्षकों की प्रार्थना के समय उपस्थिति ज्यादा और बच्चों की उपस्थिति कम देखने को मिल रही है। यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब हमारी टीम पड़ताल के दौरान कन्हरिया हाईस्कूल पहुंची।

वहां देखा गया कि मुश्किल से एक दर्जन बच्चे ही प्रार्थना में खड़े थे जबकि शिक्षक बच्चों से ज्यादा संख्या में दिख रहे थे। ज्ञात हो कि इस स्कूल में कक्षा 9 में 219 छात्र छात्राओं का नामांकन है और कक्षा 10 में 188 बच्चों का नामांकन है। वहीं कक्षा 12 में 55 बच्चे नामांकित हैं। कुल नामांकित बच्चों की संख्या 462 है। जिसमें मुश्किल से 50 बच्चे ही उपस्थित थे। वहीं शिक्षकों की संख्या लगभग दस थी। जिसमें सिर्फ दो शिक्षक बच्चों के क्लास रूम में थे बाकी सभी शिक्षक स्कूल के प्रांगण में गप्पे लड़ा रहे थे।

क्योंकि क्लास में बच्चे नगण्य थे तो पढ़ाते किसे। इससे साफ स्पष्ट होता है कि प्रखंड क्षेत्र में शैक्षणिक माहौल का क्या ग्राफ है। बच्चों की कम उपस्थिति का एक कारण यह भी है कि स्कूल में गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई का नितांत अभाव है और इस कारण बच्चे स्कूल के बजाए कोचिंग को ही ज्यादा तवज्जो देते हैं। बच्चों ने बताया कि स्कूल में कम्प्यूटर लैब की व्यवस्था होने के बावजूद भी कम्प्यूटर का क्लास नहीं होता है। विद्यालय में कम्प्यूटर लैब शोभा की वस्तु बनकर रह गयी है।

नौवीं कक्षा के छात्र मो मुश्फिक व काजल परवीन, परवाना परवीन से पूछे जाने पर कि उनके साथी स्कूल क्यों नहीं आते हैं तो बच्चों ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई के अभाव में उनके अन्य साथी विद्यालय नहीं आते हैं और जो आते भी हैं वे टिफिन के बाद घर चले जाते हैं। ग्रामीण सुरेश राय, चंदर राय, हेमंत राय, गौड़ मोहन राय ने कहा कि आज से पांच वर्ष पूर्व इसी स्कूल में बच्चों की उपस्थिति काफी अधिक होती थी। बच्चों का जब स्कूल आने का समय होता था तो सड़क पर जाम लग जाता था। लेकिन अब पहले जैसी स्थिति नहीं है। स्कूल में कब छुट्टी व कब पढ़ाई होती है इसका पता तक नहीं चल पाता है।

स्कूल में शिक्षक सिर्फ अपनी हाजिरी बनाने आते हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रखंड क्षेत्र में पठन पाठन की क्या स्थिति है। ग्रामीणों ने बताया कि दरअसल इस विद्यालय के प्रधानाध्यापक खुर्शीद आलम हैं और उन्हीं का दामाद अमानुर रहमान क्लर्क है। दोनों मिलकर विद्यालय का संचालन मनमाने तरीके से करते हैं। शिक्षक डेजी कुमार विश्वास ने बताया कि प्रधानाध्यापक खुर्शीद आलम स्कूल के किसी कार्य से पूर्णिया गए हैं और उन्होंने बताया कि बच्चों की कम उपस्थिति का यह कारण है कि 10 वीं वर्ग के 188 बच्चों का सेंटअप हो गया है और 12 वीं वर्ग के 55 बच्चों का परीक्षा हो रहा है। सिर्फ नौवीं कक्षा के ही बच्चे स्कूल आ रहे हैं। अफसोस जनक बात यह है कि पंचायत के प्रतिनिधि भी स्कूल की दुर्दशा देखने तक नहीं आते हैं ताकि पठन पाठन की व्यवस्था कुछ सुधर सके।

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