पूर्णिया: डॉक्टर और सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रहा रेफरल अस्पताल

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया

पूर्णिया/ अमौर/बिहार:  अमौर प्रखंड की 2.89 लाख की आबादी के लिए बने एकलौता रेफरल अस्पताल, स्वास्थ्य विभाग की उपेक्षापूर्ण नीति एवं चिकित्सकों के अभाव में दम तोड़ रहा है। इस अस्पताल में एएनएम की कमी एवं दवाइयों का अभाव क्षेत्र के गरीब रोगियों की बेबसी का मजाक उड़ा रहा है। इस अस्पताल में सबसे अधिक दुर्गति प्रसव पीड़ित महिलाओं की होती है। समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण इस अस्पताल में अनेक जच्चा बच्चा की जान जा चुकी है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की कुंभकर्णी तंद्रा भंग नहीं हो पाई है।

ज्ञात हो कि इस प्रखंड की जनता को बेहतर स्वास्थ्य चिकित्सा सेवा की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 1989 में यहां रेफरल अस्पताल की स्थापना की गई थी। जिसका उदघाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री भागवत झा आजाद द्वारा किया गया था। प्रारंभिक चरणों में इस अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी एवं दवाइयां उपलब्ध हुआ करता थी। जिससे अस्पताल में आए रोगियों का बेहतर उपचार हुआ करता था लेकिन विगत कई वर्षों से स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त कुव्यवस्था के कारण यह अस्पताल किसी लायक ही नहीं रहा है।

11 चिकित्सकों के स्थान पर 1 चिकित्सक 
इस अस्पताल में चिकित्सकों के स्वीकृत पद 11 हैं जिसमें मात्र एक चिकित्सक प्रभारी डॉ बीके ठाकुर कार्यरत हैं। जो खुद बीमार रहते हैं और सेवानिवृति के अंतिम पड़ाव पर हैं। इस अस्पताल में एएनएम का स्वीकृत पद 102 है जबकि सिर्फ 22 एएनएम कार्यरत हैं। प्रखंड क्षेत्र में स्वास्थ्य उपकेंद्र 49, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 6 हैं जिसमें सिर्फ एक चालू अवस्था में है। इन उपस्वास्थ्य केंद्र एवं अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति और भी दयनीय है। क्षेत्र में अधिकांश स्वास्थ्य उपकेंद्र भवन खंडहरों में तब्दील है। जिसमें स्वास्थ्य कर्मी एवं एएनएम प्रतिनियुक्त किए गए हैं। लेकिन ग्रामीणों को इन केंद्रों पर प्रतिनियुक्त स्वास्थ्य कर्मी एवं एएनएम का आजतक दर्शन नहीं हुआ है और न ही इन केंद्रों से ग्रामीणों को स्वास्थ्य चिकित्सा सेवा का  कभी कोई लाभ मिला है।

अस्पताल में मूलभूत संरचना की घोर कमी
इस अस्पताल में मूलभूत संरचना की कमी, मानव संसाधन की कमी, चिकित्सकों की कमी, सर्जन चिकित्सक की कमी, महिला चिकित्सक की कमी, एएनएम की कमी, अल्ट्रासाउंड की कमी एवं अन्य संसाधनों की कमी के कारण रोगियों का बेहतर उपचार संभव नहीं हो पा रहा है। इस अस्पताल का भवन जर्जर अवस्था में है। जो रोगियों के लिए कभी भी किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। इस अस्पताल में बिजली की समस्या गंमीर बनी हुई है। अस्पताल में हमेशा लो वोल्टेज की बिजली मिलती है। जिस कारण अस्पताल चिकित्सीय व्यवस्था प्रभावित होती है। अस्पताल परिसर में ट्रांसफॉर्मर लगाने की मांग वर्षों से की जा रही है जिसपर आजतक किसी प्रतिनिधि एवं विद्युत विभाग अधिकारियों ने कोई पहल नहीं की है।

संसाधनों कमी है लेकिन रोगियों को मिल रही स्वास्थ्य सेवा 
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ बीके ठाकुर ने बताया कि इस अस्पताल में संसाधनों की कमी के बावजूद अस्पताल में आपातसेवा, प्रसव सेवा,  एंबुलेंस सेवा, नियमित टीकाकरण, स्वच्छ पेयजल की सुविधा, एक्स-रे सुविधा, पैथोलोजी सुविधा, मरीजों के बैठने के लिए शेड की व्यवस्था, नवजात शिशु के लिए एनवीसीसी की व्यस्था,फोटोथेरेपी, ऑक्सीजन की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके अलावे परिवार नियोजन, बाल सुरक्षा योजना, कालाजार का उपचार, कुष्ट निवारण, पल्स पोलियो कार्यक्रम, विटामिन-ए, अंधापन नियंत्रण, रोगी कल्याण समिति का गठन, ग्रामीण स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समिति का गठन, विकलांगता शिविर, एड्स जांच सुविधा एवं पैथोलोजी जांच सुविधा आदि के माध्यम से अस्पताल की चिकित्सीय व्यवस्था सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने अस्पताल की विभिन्न समस्याओं से संबंधित प्रतिवेदन विभाग को दिया है। जिसपर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। यदि अस्पताल में चिकित्सकों एवं एएनएम की कमी दूर हो जाय तथा संसाधन उपलब्ध हो जाए तो यह अस्पताल क्षेत्र की जनता के लिए वरदान साबित होगी।

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