पूर्णिया:स्वछता सर्वेक्षण में पूर्णिया फिसल, 342 वां रैंक से 436 पर

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया

पुर्णिया/बिहार: स्वच्छता सर्वेक्षण 2018 में हमारा पूर्णिया शहर फिसड्‌डी साबित हुआ है। पिछले साल 342 की तुलना में अबकी बार 436 अंक प्राप्त हुए हैं। जिससे शहर में साफ सफाई समेत आमजनों को मिलने वाली सुविधाओं की कलई खुल गई है। हालांकि हमारे जनप्रतिनिधियों के द्वारा विकास के बड़े बड़े दावे किए जा रहे थे और यहां तक कि सर्वेक्षण करने आई स्वच्छता टीम के सदस्यों ने बेहद गोपनीय तरीके से शहर के विभिन्न चौक चौराहे पर जाकर शहर के हालात का जायजा लिया था।

जिसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार हालात में थोड़ा सुधार होगा लेकिन स्थिति बिल्कुल उलट हो गई और हमारा शहर साफ सफाई समेत विभिन्न मुद्दों पर 94 अंक नीचे धड़ाम हो गया। यह स्थिति यूं ही नहीं बनी बल्कि सही तरीके से कार्य का निष्पादन नहीं होने का ही परिणाम है कि विकास कार्य शिथिल पड़ गया है। हालांकि हमारे जनप्रतिनिधियों का कहना है कि कई ऐसे विकास कार्य हैं जो पिछले सात माह से अटके पड़े हैं। जिस कारण सड़क, नाला समेत अन्य कार्य निष्पादित नहीं हो पाए। लिहाजा, सर्वेक्षण में इसका नाकारात्मक प्रभाव पड़ा।

…4200 शहरों में किया गया सर्वेक्षण : 

बता दें कि अबकी बार पूरे देश में 4200 शहरों में सफाई की स्थिति का आंकलन किया गया। 04 जनवरी से स्वच्छ सर्वेक्षण 2018 की शुरूआत की गई। पिछले वर्ष इसमें केवल 434 शहरों को शामिल किया गया था और इससे पहले साल 2016 में सिर्फ 73 शहर शामिल थे। साल 2014 से स्वच्छ भारत अभियान के तहत शुरू किया गया यह तीसरा सर्वेक्षण है। केंद्र सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान के लिए वित्तीय वर्ष 2014-15 से लेकर अब तक बजट में 33 हजार 875 करोड़ रुपए आवंटित किए। अभियान की जमीनी हकीकत जानने के लिए ही हर साल स्वच्छ सर्वेक्षण किया जाता है। यह सर्वेक्षण क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा किया जाता है।

…डोर टू डोर वेस्ट कलेक्शन से नहीं बनी बात : 

कयास लगाए जा रहे थे कि डोर टू डोर वेस्ट कलेक्शन की शुरूआत हो जाने से शहर की रैंकिंग में सुधार होगा लेकिन ऐसा हो न सका। बल्कि 94 अंक और लुढ़क गया। हालांकि इस मुद्दे को लेकर कई बार बोर्ड बैठक में भी सवाल उठाए गए कि बिना सॉलिड वेस्ट के निबटान के डोर टू डोर वेस्ट कलेक्शन का कोई औचित्य नहीं है। बता दें कि अबतक शहर में डंपिंग जोन तक डेवलप नहीं किए गए। जिसका सीधा असर हमारे शहर की रैंकिंग पर पड़ा है। यही नहीं शहर में सार्वजनिक शौचालय का न होना भी सबसे अहम कारण माना जा रहा है। सर्वेक्षण के दौरान शहर में 56 विभिन्न जगहों पर सार्वजनिक शौचालय निर्माण काे लेकर सहमति तो दी गई लेकिन क्रियान्वयन नहीं होने के कारण भी हमारे शहर को अंक नहीं मिल पाया। इसके अलावे मुख्य नाले समेत गली मोहल्लों की नालियों की समुचित सफाई नहीं होने, पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होना भी अंक में गिरावट का कारण बताया गया है।

…हम सबने प्रयास किया है और आगे भी जारी रहेगा : 

शहरी क्षेत्र के विकास को ले प्रयास जारी है। सभी वार्डों में विकास कार्य को ले 50-50 लाख रूपए का विकास कार्य अटका है। इसके अलावा डोर टू डोर वेस्ट कलेक्शन समेत सार्वजनिक शौचालय के निर्माण का भी रास्ता साफ हो गया है। जिसके बाद शहर की रैंकिंग में सुधार होगा।

: विभा कुमारी, मेयर, नगर निगम, पूर्णिया।

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