पूर्णिया:ककड़ी की खेती कर किसान बना रहे अलग पहचान

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार: पूर्णिया पूर्व प्रखंड के बीरपुर पंचायत अंतर्गत सिमलगाछी गांव के किसान तिमिर पाल व चंदन पाल 1 एकड़ खेत मे ककड़ी की खेती कर कृषि क्षेत्र में अलग पहचान बना चुके हैं। इलाके के लोगों में इस आधुनिक खेती को लेकर होर मची हुई है। ककड़ी की खेती से वे अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं।

पूर्व में भी सिमलगाछी के किसानों ने फूल, बैर व अन्य खेती कर काफी सुर्खियां बटोरी थी। किसान चंदन पाल ने बताया कि दूर के रिश्तेदार ने बताया कि ककड़ी की खेती से अच्छा खासा मुनाफा कमा सकते हो। हमने उन्हीं से जानकारी लेकर खेती शुरू की। उन्होंने कहा कि हमने भी पहली बार इस तरह की खेती की थी तो नुकसान पहुंचने का भी भय सता रहा था कहीं लागू पूंजी न डूब जाए। लेकिन जब पौधे में फलन आया तो हौंसला बढ़ता चला गया। नजदीक में इसका बाजार नहीं होने के कारण पटना या सिल्लीगुड़ी में इसे बेचा जाता है। जहां इसका न्यूनतम मूल्य 18 से बीस रुपए प्रति किलो है।

हालांकि अब इस खेती का समय अवधि समाप्ति पर है। ककड़ी की खेती करने के लिए ऐसी जमीन की जरूरत है जहां जलजमाव की समस्या न हो। बलुवाही या मिट्टीयार जमीन इसकी खेती की जा सकती है। पूर्व में भी फूल व बैर की खेती की थी।

…खेती करने की विधि :

इस खेती को करने के लिए सर्वप्रथम खेत को तैयार कर उसके उपरांत जैविक खाद मिलाकर क्यारी बनाई जाती है।उसके बाद पंक्तिबद्ध तरीके से प्लास्टिक पूरे खेत में डाल कर जगह बनाकर बीज डाला जाता है। प्लास्टिक के इस्तेमाल से फल व पौधे जमीन पर नहीं जाते हैं। जिससे फलों में सड़न की मात्रा कम होती है। साथ ही साथ खेतों में उर्वरा शक्ति भी बनी रहती है। पौधे में फल लगने के बाद प्लास्टिक की थैली में केमिकल लगाकर वृहत संख्या में लगाया जाता है। जिससे कीट व कीड़े मकोड़े उससे चिपक जाते हैं और पौधे व फल सुरक्षित रहते हैं।

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