पूर्णिया:अब ट्रेन की एसी बॉगी में फेस टॉवेल की जगह मिलेंगे डिस्पोजेबल नैपकिन 

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार : ट्रेन की एसी बॉगी में मुफ्त तौलिया की सुविधा समाप्त होगी। एसी बॉगी में यात्रियों को फेस टॉवेल की जगह डिस्पोजेबल नैपकिन दिए जाएंगे। इसके लिए सारी कवायदें पूरी कर ली गईं हैं और 26 जून को बाकायदा रेलवे मुख्यालय से न सिर्फ पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर को बल्कि देश के सभी रेलवे जोन के महाप्रबंधक को पत्र निर्गत कर दिया गया है।

मिली जानकारी अनुसार वैशाली सुपरफास्ट एक्सप्रेस के वातानुकूलित यान में यात्रा करने वाले यात्री 15 अगस्त के बाद रेलवे द्वारा निःशुल्क में मिलने वाले तौलिया की सेवा का मजा नहीं ले पाएंगे। इतना ही नहीं एक माह के प्रयोग के बाद रेल यात्रियों से ली गई फीडबैक के आधार पर अन्य सभी एक्सप्रेस ट्रेनों के बाद वातानुकूलित यान में भी यह सुविधा समाप्त कर दी जाएगी। हालांकि इसके बदले रेल मंत्रालय ने इन यात्रियों को डिस्पोजेबल नैपकिन दिए जाने का फैसला लिया है।

रेलवे मुख्यालय से न सिर्फ पूर्व मध्य रेलवे हाजीपुर को बल्कि देश के सभी रेलवे जोन के महाप्रबंधक को पत्र भी निर्गत कर दिया गया है बल्कि एनएफ रेल मंडल कटिहार में भी इस योजना को अमल में लाए जाने की तैयारी चल रही है।

…कैसा होगा नया डिस्पोजेबल नैपकिन : 

नई व्यवस्था के तहत रेलवे ने वातानुकूलित बोगी के यात्रियों को जो डिस्पोजेबल नैपकिन उपलब्ध करवाने का फैसला लिया है। वह 50 फीसदी कॉटन और 50 फीसदी बायोडिग्रेडेबल मटेरियल का बना होगा। 40 सेंटीमीटर लंबे एवं 30 सेंटीमीटर चौड़े इस डिस्पोजेबल नैपकिन में रेलवे को 3.53 रुपए की अनुमानित लागत आएगी।

यात्रा के दौरान कम दूरी की यात्रा करने वाले वातानुकूलित बोगी के रेल यात्रियों को एक डिस्पोजेबल नैपकिन जबकि लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वातानुकूलित बागी के रेल यात्रियों को दो डिस्पोजेबल नैपकिन दिए जाने का फैसला रेलवे ने लिया है।

…पहले चरण में कुछ खास ट्रेनों में प्रयोग किया जाएगा :

एनएफ रेल मंडल कटिहार के सीनियर डीसीएम विवेकानंद द्विवेदी ने बताया कि रेलवे बोर्ड द्वारा निर्गत किए गए इस निर्देश के बाद प्रथम चरण में कुछ खास ट्रेनों में डिस्पोजेबल नैपकिन का इस्तेमाल प्रयोग के रूप में किया जाएगा।

जिसके बाद यात्रियों की ओर से आने वाली फीडबैक के आधार पर बाद में इसे स्थाई रूप से लागू किए जाने पर विचार किया जाएगा। रेलवे के इस फैसले से जहां एक ओर रेलवे को तौलिया की चोरी से प्रतिवर्ष होने वाले लाखों के राजस्व की क्षति पर रोक लगेगा। वहीं दूसरी ओर यात्रियों को आए दिन तौलिया के साफ नहीं होने या गंदा तौलिया ट्रेन में दिए जाने की शिकायत से भी मुक्ति मिलेगी।

…क्यों लिया गया यह फैसला :

वातानुकूलित यान के रेल यात्रियों को फेस टॉवेल (तौलिया) की सुविधा बंद किए जाने के संबंध में रेलवे ने आए दिन इन तौलिये की होने वाली चोरी को कारण बताया है। रेलवे के अधिकारियों की मानें तो सिर्फ मुंबई से दूसरे शहरों में चलने वाली विभिन्न ट्रेनों से प्रतिमाह 70 से अधिक तौलिया चोरी की शिकायत आती थी। रेलवे के एक रिपोर्ट के अनुसार, इस रूट की सिर्फ 56 विभिन्न ट्रेनों में वर्ष 2016-17 में ही करीब 70 हजार रुपए से ज्यादा मूल्य की चादरें और तौलिया गायब हो गई। इसके अलावा पूरे देश के विभिन्न ट्रेनों से प्रति माह लाखों रुपए मूल्य की तौलिया व चादरें प्रतिवर्ष गायब कर दिए जाते हैं। जिससे लाचार होकर रेलवे को यह निर्णय लेना पड़ा।

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