पूर्णिया: मक्के की खेती में किसानों की किस्मत में केवल पौधे की हरियाली, दाने के दर्शन नहीं

नीरज झा/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार:  पिछले साल की तरह अबकी बार भी मक्के की फसल में दाना नहीं आने से किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बता दें कि केनगर प्रखंड क्षेत्र के झुनी पंचायत अंतर्गत जगनी ए गांव निवासी मनोज कुमार मेहता ने तीन एकड़ खेत में पायोनियर कंपनी का 3522 मक्का, किरण देवी ने तीन एकड़ में 3522 मक्के की बीज, गौरी शंकर मेहता ने तीन एकड़ खेत में 3522 मक्का, ललिता देवी पति उदय कुमार मेहता ने तीन एकड़ 3522 मक्का, शिवशंभू प्रसाद मेहता ने दस एकड़ श्रीकर कंपनी के 3366 मक्का, नृपेंद्र प्रसाद मेहता ने चार एकड़ में 3522 मक्का बोया था लेकिन उनकी किस्मत में भी केवल मकई के पौधे आए। क्योंकि मकई में दाने नहीं हैं।

वहीं अरूण कुमार मेहता ने दो एकड़ में 3522 मक्का, किशोर प्रसाद मेहता ने दो एकड़ खेत में 3522 मक्का, अनुज कुमार मेहता ने दो एकड़ खेत में 3522 मक्का, शंकर मेहता ने एक एकड़ खेत में श्रीकर 3366 मक्का, मलानंद मेहता ने एक एकड़ में 3522 मक्का समेत कई अन्य किसानों ने नामचीन कंपनियों की बीज को अपने खेतों में बोया था। लेकिन अबकी बार किसानों को बीज कंपनी दगा दे गई।

सिर्फ केनगर प्रखंड के एक दर्जन से ऊपर कुल 39 एकड़ के किसानों ने जगनी जगन्नाथपुर मौजा अंतर्गत मिर्जापुर मारा काहनी बहियार में मक्का अपने खेतों में लगाया था। किसान ने बताया कि पिछले वर्ष भी उन्होंने कड़ी मेहनत की थी लेकिन उस घाटे से ऊबर भी नहीं पाए थे कि अबकी बार भी बीज कंपनियों ने घाटे का सौदा करा दिया। किसानों ने बताया कि मक्के की बुआई 15 अक्टूबर 2017 से अंतिम अक्टूबर तक की थी। जिसमें बीस से पच्चीस हजार रूपए प्रति एकड़ खर्च आता है। बाली आने तक उक्त सभी मेहनत व खर्च कर डाला।

मौसम की मार व भयंकर घाटा चौतरफा मार झेलने पर विवश कर दिया है। किसान किरण देवी, नृपेंद्र प्रसाद मेहता ने बताया कि हमलोगों ने यूको बैंक, स्टेट बैंक शाखा चंपानगर से केसीसी ऋण लेकर खेती की है। वर्तमान हालत ऐसी है बैंक में ऋण जमा करना तो दूर पारिवारिक जीविका पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ज्ञात हो कि बीस फीसदी किसान बैंकों से कर्ज लेकर खेती करते हैं। जबकि अस्सी फीसदी किसान ग्रामीण साहुकारों से मासिक ब्याज पर कर्ज लेकर खेती करते हैं। लगातार खेती में घाटे से मार खाए किसानों ने पिछले कर्ज से उबरने को लेकर कमर तोड़ मेहनत की थी। ताकि सेठ साहुकारों के कर्जे से उन्हें मुक्ति मिल सके। लेकिन मौसम की मार और बीज कंपनियों द्वारा गलत बीज उपलब्ध कराए जाने के कारण उनके मेहनत पर पानी फिर गया है। क्षेत्र के किसानों ने सरकार से फसल जांच उपरांत ऋण माफी व क्षतिपूर्ति की मांग की गुहार लगाई है।

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