पूर्णिया: पॉलीथीन का बढ़ता प्रयोग पर्यावरण में जहर घोल रहा है

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया
पूर्णिया/बिहार:  उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद पर्यावरण व स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक प्लास्टिक थैलियों का उपयोग प्रखंड क्षेत्र में धड़ल्ले से हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्र हो या फिर बाजार हर दुकान में इन प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग हो रहा है। लोग इसे इस्तेमाल में लाने के बाद सरेआम फेंक भी देते हैं। जिससे न सिर्फ नालियां अवरूद्ध होती हैं बल्कि पर्यावरण के प्रदूषित होने का खतरा भी दोगुना बढ़ जाता है।
वहीं दूसरी ओर चाय की दुकानों में भी अब मिट्‌टी के कुल्हड़ कम ही नजर आते हैं और लोगों को प्लास्टिक के ग्लास में ही चाय दी जा रही है। जो कि कैंसर का कारण बन सकते हैं। यही नहीं प्लास्टिक के अत्यधिक उपयोग से जहां पर्यावरण प्रदूषित होने का खतरा है। वहीं जमीन की उर्वरा शक्ति भी कम हो सकती है। प्लास्टिक धीरे धीरे जमीन को बंजर बना रहा है और यदि सही वक्त पर हम सचेत नहीं हुए तो वो दिन दूर नहीं जब हमें इसके भयंकर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
भूजल में अमोनिया की मात्रा बढ़ रही है और इससे कई नई बीमारियां भी उत्पन्न हो रही है। इस संबंध में चिकित्सा पदाधिकारी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बीकोठी, डॉ अजय मंडल कहते हैं कि हमें संकल्प लेने की जरूरत है ताकि हम प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग न करें। उन्होंने कहा कि बाजारों में घटिया किस्म की प्लास्टिक थैलियां उपलब्ध हैं जिसमें खाद्य सामग्री को रखना सेहत से खिलवाड़ करने जैसा ही है। इससे चर्म रोग, कैंसर, पेट से संबंधित बीमारियां होने का खतरा दोगुना हो जाता है।
संजय बनर्जी, जैविक खेती के जानकार
जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले व रिटायर्ड बैंक प्रबंधक संजय बनर्जी ने सरकार, प्रशासन और आमजनों से प्लास्टिक के खिलाफ मुहिम शुरू किये जाने की अपील की है। उनका कहना है प्लास्टिक थैलियों के उपयोग से न सिर्फ मृदा प्रदुषण बल्कि जल और वायु प्रदूषण भी हो रहा है ।लोगो के द्वारा प्लास्टिक को जहाँ तहाँ जलाया जाता है जिससे निकले वाली जहरीली गैस मानवीय जीवन और पर्यावरण के लिए बेहद खतनाक है।शराब बंदी,दहेज़ प्रथा ,बाल विवाह की तरह प्लास्टिक के थैलियों के खिलाफ भी मुहिम शूरु किये जाने की जरूरत है।
Loading...