जैविक खाद से जमीन और जीवन दोनों स्वस्थ होंगे, इनकी बात मान लीजिये

कुमार गौरव/पूर्णिया

पूर्णिया : अब वक्त आ गया है कि हमें रासायनिक उर्वरकों से तौबा कर लेनी चाहिए। रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग से न सिर्फ जेबें ढीली होती हैं बल्कि इसका शरीर व पर्यावरण पर बुरा प्रभाव भी पड़ता है। वहीं जिले के एकमात्र जैविक ग्राम मुलकिया पंचायत के सहसोल निवासी व नाबार्ड से पुरस्कृत सुरेंद्र यादव खेतों में जैविक खाद व दवाई के प्रयोग और महत्ता के बारे लोगों को न सिर्फ जागरूक करते हैं बल्कि गांव गांव जाकर इसकी महत्ता भी किसानों को समझाते हैं ताकि जमीन की उर्वरा शक्ति कायम रहे। विशेष बातचीत के क्रम में सुरेंद्र यादव व सुनील बनर्जी ने बताया कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से जमीन बंजर होने लगती है और इसकी उर्वरा शक्ति भी घटने लगती है। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों के इस्तेमाल से जमीन के बंजर होने के साथ साथ उसमें मौजूद प्राकृतिक तत्वों का भी ह्रास होने लगता है। मसलन केंचुआ जो कि नैसर्गिक रूप से जमीन में नाइट्रोजन की मात्रा को नियंत्रित करता है वह समाप्त हो जाता है। वहीं जैविक खाद के उपयोग से जमीन की उर्वरा शक्ति प्राकृतिक तौर पर बढ़ती ही है साथ ही केंचुआ की संख्या भी बढ़ जाती है और नाइट्रोजन की मात्रा नैसर्गिक रूप से बढ़ने लगती है। इसका सीधा फायदा किसानों को मिलता है और उत्पाद में बिना किसी प्रयास के बढ़ोत्तरी होती है।

जैविक दवा भी है बेहतर विकल्प
जिले के एकमात्र जैविक ग्राम मुलकिया पंचायत के सहसोल से आए व नाबार्ड से पुरस्कृत सुरेंद्र यादव व शहर में जैविक खेती को बढ़ावा देने वाले संजय बनर्जी ने खेतों में जैविक दवाई का प्रयोग करने तथा बनाने के तरीके के बारे में जानकारी दी। साथ ही कहा कि मिट्टी के बर्तन में 05लीटर गौमूत्र, 2.50ग्राम नीम का पत्ता, 1.5 किलो अड़वन व बेहाया का पत्ता, खैनी की डंठल, 2.5किलो लहसुन की खूट्टी, धतूरा फल 2.50किलो इन सभी को मिलाकर मिट्टी के अंदर सड़ने दें व मथकर तरल होने पर किसी फसल पर इसका छिड़काव करने से बेहतर परिणाम आता है। उन्होंने बताया कि जैविक दवा जो काफी कम रूपए में बन सकती है और इससे पर्यावरण को नुकसान भी नहीं है। उन्होंने रासायनिक उर्वरक से होने वाले नुकसान को बताते हुए कहा कि अक्सर महिलाएं धान रोपनी में जाती हैं और खेतों में रासायन के प्रयोग के कारण उन सभी के हाथ पांव में चर्म रोग की समस्या हो जाती है। जो बाद में उनके लिए काफी घातक साबित होता है। उन्होंने बताया कि पूर्णिया पूर्व प्रखंड के पंचायतों में सब्जी की खेती बड़े पैमाने पर होती है और किसान कम समय में अधिक उत्पाद पाने की चाहत में धड़ल्ले से रासायनिक उर्वरकों व दवा का इस्तेमाल अपनी फसलों पर करते हैं। जो सेहत के लिए बेहद खतरनाक होता है। लेकिन जैविक दवा को तैयार कर यदि किसान इसका छिड़काव करें तो बेशक उत्पादन बढ़ाया जा सकता है और इसका कोई नकारात्मक प्रभाव भी सेहत पर नहीं पड़ता है।

ऑर्गेनिक खेती का कमाल कभी बंजर थी ये जमीन अब यहां फसल उगाई जा रही है

बेहद उत्साहित हैं किसान
जिले के करीब 50 किसानों को इस जैविक दवा का लाभ मिला है। सोनदीप के अखिलेश प्रसाद सिंह, राधेश्याम साह, अशोक कुमार और धमदाहा के राघव प्रसाद साह व दयानंद कुमार कहते हैं कि उन्होंने इस दवा का छिड़काव आलू की फसल पर किया और अच्छा परिणाम सामने आया है। सुरेंद्र यादव बताते हैं कि उन्होंने अपने इस उत्पाद का प्रदर्शन कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़ में किया था। जिसकी रिपोर्ट पटना भेजी गई। इसके बाद उन्हें नाबार्ड से सम्मानित किया गया।

जैविक खाद के साथ जैविक दवा अच्छी पहल है
जिला कृषि पदाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद ने कहा जिले के किसानों को जैविक खाद के साथ जैविक दवा बनाने के गुर सिखाए जाने की अच्छी पहल है। हालांकि विभाग द्वारा किसानों को इनके बारे में जागरूकता फैलाने के लिए शिविरें लगाईं जाती हैं। वर्मी बेड समेत अन्य तरीकों के उपाय भी बताए जाते हैं। अबतक विभागीय स्तर पर जैविक दवा बनाने के आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। यदि कोई दिशा निर्देश प्राप्त होता है तो बेशक जिले के किसानों को इसका लाभ दिया जाएगा।

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