पूर्णिया: दियरी-कदवा गांव से विकास रूठ गया यहां न हैंडपंप, न सड़क, न बिजली

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया

पूर्णिया/कसबा/बिहार: एक ओर केंद्र सरकार देश में डिजिटल इंडिया के नाम पर कई बड़े बड़े वायदे कर रही है तो दूसरी ओर आज भी कई पंचायतों में विकास की किरण नहीं पहुंची है। प्रखंड के दो पंचायत सब्दलपुर संझेली के दो गांव बसे दियारी और कदवा गांव में सरकार के सभी वायदे हवा हवाई साबित होते नजर आ रहे हैं। दियारी से कदवा जाने वाली सड़क जगह जगह पोखर तथा टापू का रूप ले लिया है। बाढ़ के समय इन सड़कों पर पांच फीट तक पानी जमा हो जाता है। इस सड़क पर बने पुल पुलिया बाढ़ की चपेट में आने से पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। लोग मजबूरन कसबा होते कॉलेज चौक से संझेली कदवा समेत अन्य पंचायत तक पहुंचते हैं।जिसकी दूरी करीब 20 किलोमीटर होती है।

अगर दियारी से कदवा जाने वाली सड़कों का निर्माण कर दिया जाए तो लोगों को अन्य पंचायत जाने में तीन किलोमीटर की दूरी कम तय करनी पड़ेगी। बरसात के समय में सड़क पर तीन से पांच फीट तक पानी का बहाव होता है और सड़क नदी का रूप धारण कर लेती है। अगर लोगों को कदवा संझेली, लखना, डुमरी, मजगमा, बालासर समेत अन्य गांव जाना होता है तो नाव का सहारा लेना पड़ता है। अगर नाव नहीं मिली तो राहगीर मजबूर होकर 20 किलोमीटर दूरी तय कर कदवा गांव जाते हैं यह एक बड़ी समस्या है। लेकिन इस गांव में सड़क नहीं है और न ही किसी अधिकारी और न ग्राम पंचायत ने इस समस्या की सुध ली है। लोगों की उम्मीदों पर कोई भी अधिकारी खरा नहीं उतर पाया है। आज भी इस गांव के लोग पैदल ही आते जाते हैं। यूं तो लोग दशकों से सड़क नहीं बनने का दंश झेल रहे हैं लेकिन महिलाओं और बुजुर्गों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

कोरे आश्वासन के सिवाए कुछ भी नहीं मिला
जनप्रतिनिधियों के द्वारा लोगों को सड़क बनवाने के सैकड़ों कोरे आश्वासन दिए गए लेकिन किसी ने गांव की जमीनी हकीकत को जानने की कोशिश नहीं की। आज भी सब्दलपुर और संझेली के दियारी तथा कदवा ग्राम पंचायत से अलग थलग पड़ा है। गांव वालों का कहना है कि सड़क बनने के इंतजार में पूरी जिंदगी गुजार दी लेकिन सड़क गांव तक नहीं पहुंची। यूं तो लोग भी मानते हैं कि सड़क बनने से क्षेत्र का विकास होता है मगर जिस तरह से इस गांव के लोगों की अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं। इससे तो साफ है कि गांव वालों के साथ कितनी नाइंसाफी हो रही है।

600 लोगों में मात्र एक हैंडपंप

दियारी गांव जिसमें करीब 500 से 600 लोग निवास करते हैं लेकिन उस गांव में पीने के पानी के लिए पूरा गांव एकमात्र चापाकल के ऊपर निर्भर है। गांव में न तो हैंडपंप लगे हैं और न ही गांव में लोगों के घरों में नल कनेक्शन हो पाया है। साधनों का अभाव, स्ट्रीट लाईट का अभाव समेत कई अन्य सुविधाएं आजतक इस गांव को नसीब नहीं हो पाई है। गांव में प्रवेश करने से पहले गांव के नाम का बोर्ड का नाम भी नहीं लगा है। जिससे लोगों को पता चल सके ही यहां भी गांव बसा हुआ है।

आजादी के बाद भले ही कितने सरपंच बदले लेकिन इस गांव के लोगों को मात्र वोट के समय में ही जनप्रतिनिधि याद करते हैं बाकी दिनों उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। ग्रामीण तनवीर आलम ने बताया कि आजादी के 70 साल गुजर जाने के बाद भी हमारे गांव को कोई मूलभूत सुविधा नहीं मिल पाई है। जिस कारण आज भी यहां के लोग नरकीय जीवन जी रहे हैं।

…विधानसभा पटल पर रखा जाएगा मामला :
जहां तक सड़क का मामला है इसे जल्द ही पूरा किया जाएगा। अगले विधानसभा सदन की बैठक में मुख्य रूप सड़क निर्माण का प्रस्ताव सामने लाया जाएगा।
: मो आफाक आलम, विधायक, कसबा।

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