पुर्णिया: गांव की आबादी भी है, बच्चे भी हैं लेकिन स्कूल नहीं है, दूसरे गांव में करते हैं पढ़ाई

प्रियांशु आनंद/पुर्णिया
पुर्णिया/बिहार:  बायसी प्रखंड के सुगवा महानंदपुर पंचायत के काजल गांव के बच्चे आज भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर हैं। इस पंचायत को एक अदद स्कूल तक नसीब नहीं है जबकि गांव में दो वार्ड हैं। दोनों वार्डों को मिलाकर गांव की आबादी लगभग 5 हजार से अधिक है। यह गांव महानंदा नदी के किनारे है। गांव के लोगों को 3 किलोमीटर कच्ची सड़क पार करने के बाद ही मुख्य सड़क का मार्ग मिलता है।
बता दें कि इस गांव में एक भी पक्की सड़क नहीं है। ग्रामीण धीरेंद्र राय कहते हैं कि सबसे ज्यादा परेशानी बरसात के मौसम में होती है। गांव के चारों तरफ पानी ही पानी रहता है। 3 किलोमीटर पानी पार करने के बाद ही सड़क दिखाई देती है। पिछले वर्ष गांव के आधे हिस्से में बिजली कनेक्शन दिया गया था और आधे हिस्से में यह सुविधा नदारद है।
ग्रामीण मुजीबुर्रहमान बताते हैं कि सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को पढ़ाई करने में होती है। इतनी बड़ी आबादी रहने के बावजूद भी गांव में एक भी स्कूल नहीं है। ग्रामीण किशोर ठाकुर, दिलीप ठाकुर बताते हैं कि गांव की बदकिस्मती यह है कि इस गांव का स्कूल दूसरे गांव उज्जैन में चल रहा है। उज्जैन गांव में ही पहले से स्कूल है और उस स्कूल के सौ मीटर की दूरी पर प्राथमिक विद्यालय काजल के नाम से स्कूल चल रहा है लेकिन आज तक भी किसी प्रतिनिधि ने इस ओर ध्यान नहीं दिया कि इस गांव का स्कूल दूसरे गांव में चल रहा है।
ग्रामीण विकास राय, धीरेंद्र राय कहते हैं कि यहां के बच्चे पढ़ाई करना चाहते हैं लेकिन विद्यालय के अभाव में वे अपनी पढ़ाई से वंचित हैं। ग्रामीण मो रज्जाक का कहना है कि गांव की लड़की विद्यालय के अभाव में पढ़ाई नहीं कर पाती है। गांव में एक ही आंगनबाड़ी केंद्र है जो अभी केंद्र चल रहा है लेकिन वह भी आंगनबाड़ी केंद्र कई साल से अधूरा है। इस पर भी बड़े पदाधिकारी व प्रशासन का भी कोई ध्यान नहीं है। आखिर कब तक आंगनबाड़ी केंद्र का काम पूरा किया जाएगा। ग्रामीणों ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए जिला प्रशासन व अनुमंडल प्रशासन से स्कूल खोलने की मांग की है। जिससे इस गांव के बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो सके।
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