पूर्णिया: नगर निगम का बजट 28 फरवरी को

नीरज झा/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार:  28 फरवरी को पेश होने वाले बजट को लेकर एक बार फिर नगर निगम में गहमागहमी का दौर तेज हो गया है। सभी 46 वार्डों से जहां आमसभा के बाद पारित पब्लिक डिमांड को निगम में प्रस्तुत किया गया वहीं कई ऐसे मुद्दे हैं जो गत वर्ष पेश किए गए 04 अरब 52 करोड़ के भारी भरकम बजट में उल्लेखित होने के बाद भी अबतक पूरा नहीं हुआ है। सिर्फ डोर टू डोर वेस्ट कलेक्शन व एनजीओ की तैनाती और कुछ ट्रैक्टरों की खरीद को छोड़ दें तो बाकी प्रस्तावों पर कोई काम नहीं हो सका है।

बता दें कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में पेश किए गए बजट में साफ सफाई मद में 05 करोड़, मरम्मत व रखरखाव एवं अन्य मद में 2.03 करोड़, बिजली ईंधन मद में 5.06 करोड़, सड़क निर्माण मद में 103.50 करोड़, ड्रेनेज व सीवरेज मद में 21.32 करोड़, संयंत्र एवं मशीनरी के लिए 05 करोड़, वाहन क्रय मद में 05 करोड़, सड़कों पर प्रकाश लगाने के मद में 14.50 करोड़ रूपए का भारी भरकम बजट रखा गया था। लेकिन इन तमाम मुद्दों पर जब पड़ताल की गई तो डोर टू डोर वेस्ट कलेक्शन, एनजीओ की तैनाती के अलावे कुछ खास काम नहीं किया गया।

किन मुद्दों पर बनती बात तो बदल जाती शहर की सूरत
नगर निगम द्वारा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, ऑटो रिक्शा स्टैंड का निर्माण, वेंडिंग जोन का निर्माण, सार्वजनिक शौचालय, शहरी पर्यावरणीय प्रबंधन से संबंधित कार्य, सामुदायिक व विवाह भवन, शव वाहन की खरीद, ड्रेनेज व नालों की समुचित सफाई के साथ साथ निर्माण, वार्डों में कच्ची सड़क की जगह पक्की सड़क का निर्माण, ठोस कचरे का उठाव समेत कई अन्य ऐसे मुद्दे हैं जिस पर नगर निगम के पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि ज्यादा गंभीर नहीं दिखे।

व्यय का तो बना लेखा जोखा, नहीं बनी आय की फेहरिस्त
नगर निगम के अमूमन सभी वार्डों में आनन फानन में आम सभा कर व्यय का लेखा जोखा तो तैयार कर लिया गया लेकिन निगम की आय कैसे बढ़े इस दिशा में शायद ही किसी पार्षद ने गंभीरता दिखाई। लिहाजा, कयास लगाए जा रहे हैं कि अबकी बार घाटे का ही बजट तैयार होगा। हालांकि पुरजोर कोशिश यह चल रह है कि इस बजट में कुछ नया हो और शहरवासियों के लिए जो पिछले बजट में वायदे किए गए थे उसे पूरा किया जा सके। जबकि पूर्व से ही रिक्शा, ऑटो रिक्शा, दुकान समेत कई अन्य माध्यमों से ही आय की उगाही की जा रही है। आय बढ़ाने के मद में न तो शहर में पार्क, सार्वजनिक शौचालय या फिर अन्य मनोरंजन के साधन को विकसित किए गए।

साफ सफाई का है बुरा हाल
शहर में सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए दो दो एनजीओ की तैनाती तो कर दी गई लेकिन सही तरीके से मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण आज शहर में अधिकांश जगहों पर गंदगी पसरी है। मुख्य नाले की स्थिति तो विकराल हो चुकी है। आसपास रहने वाले लोगों को सड़ांध व बीमारी का सामना करना पड़ता है। लेकिन इसके बाद भी ड्रेनेज व सीवरेज सिस्टम को पटरी पर नहीं लाया गया।

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