पुर्णिया:एक फार्मासिस्ट के नाम पर संचालित हो रही हैं कई दवा दुकानें, विभाग बेफिक्र 

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया
पूर्णिया/बिहार: डॉक्टर पर तो लापरवाही का आरोप लगता रहा है मगर दवा दुकानदार भी सेहत के साथ खिलवाड़ करने में नहीं हिचकते है। प्रखंड में दर्जनों दवा की दुकान ऐसी है जो बिना फार्मासिस्ट के संचालित हो रही है। जागरुकता के अभाव में ऐसे मरीजों का फायदा उठाकर कई ऐसे दवा दुकानदार हैं जो एक डॉक्टर की तरह बीमारी पूछकर मरीजों को दवा दे देते हैं। वे मरीजों को पक्का बिल न देकर सरकार को भी राजस्व का चूना लगाते हैं। ऐसे दवा दुकानदारों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई करना मुनासिब नहीं समझता है। प्रखंड में लगभग चार दर्जन दवा दुकानें चल रही हैं और एक फार्मासिस्ट के नाम पर कई कई दुकानें संचालित हो रही हैं। लेकिन विभाग इस ओर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझ रहा है।

…किराये पर मिलती है फार्मासिस्ट की डिग्री : 

जिले में बिना फार्मासिस्ट के दवाइयों की दुकानें धड़ल्ले से चल रही है। फार्मासिस्ट लाइसेंस किराये पर देकर कहीं दूसरी जगह नौकरी कर रहे हैं। ऐसे में मात्र कुछ रुपयों में लाइसेंस किराये पर लेकर अनपढ़ लोग दवाइयां बेचते हैं और लोगों की जान को आफत में डालते हैं। कम पढ़े लिखे होने के कारण कई बार ये लोगों को गलत दवाइयां भी दे देते हैं। यह गोरखधंधा लंबे समय से जारी है। लेकिन इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

...क्या है नियम : 

नियमानुसार एक फार्मासिस्ट एक ही जगह पर काम कर सकता है। इसके लिए उसे शपथ पत्र देना पड़ता है। एक लाइसेंस पर एक ही दुकान खोली जा सकती है। लाइसेंस धारक को स्वयं दुकान पर बैठना होता है। दवाइयों की खरीद फरोख्त का हिसाब किताब उसे खुद रखना होता है। दवा केवल बिल पर फार्मासिस्ट द्वारा ही बेची जा सकती है। 24 घंटे दवाइयां उपलब्ध कराने वाली दुकानों पर एक से अधिक फार्मासिस्ट रखने का प्रावधान है। अगर कोई फार्मासिस्ट लाइसेंस देने के बाद कहीं दूसरी जगह नौकरी करता पाया जाता है तो यह नियम 65 का उल्लंघन है और 27 डी के तहत सजा का प्रावधान है। जिस जगह का लाइसेंस लिया जाता है केवल वहीं पर दवाई बेची जा सकती है।

क्या है प्रावधान : 

बिहार स्टेट फार्मासिस्ट काउंसिल 1940 एक्ट के तहत एक फार्मासिस्ट का निबंधन से राज्य में किसी एक ही दवा दुकान के संचालन के लिए किया जा सकता है। दुकानों में फार्मासिस्टों को बिना चिकित्सक की पर्ची के दवा को नहीं बेचना है। जो भी व्यक्ति दवा की खरीदारी करता है उसे पक्का बिल दुकानदार को देना है। इन दुकानों में फार्मासिस्ट की देखरेख में गैर मान्यता प्राप्त युवक सिर्फ सहायक का कार्य कर सकते हैं। सहायक की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।

…दवा दुकानदार नहीं देते पक्का बिल : 

प्रखंड में संचालित होने वाले अधिकतर दवा दुकानदार ग्राहकों को पक्का बिल नहीं देते है। जबकि दुकानदार दवा की पूरी कीमत ग्राहक से वसूलते हैं। कच्चा बिल थमाने से सरकार को इस मद में मिलने वाले राजस्व की हानि होती है। इस संबंध में कसबा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ राजेंद्र प्रसाद मंडल ने बताया कि इसकी देख रेख जिला डीआईओ द्वारा की जाती है और इसकी जांच की जाएगी।

(Visited 12 times, 1 visits today)
loading...