पूर्णिया: आम और लीची के किसान अच्छी फसल के लिए इन बातों का रखें ध्यान

कुमार गौरव/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार:  सदाबहार बसंत ऋतु आम और लीची के पेड़ों में मंजर लगने का उत्तम समय होता है। इस समय में पेड़ पौधों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, आम लीची के मंजर पर रासायनिक दवा का छिड़काव भूल कर भी किसान नहीं करें। कृषि विज्ञान केंद्र जलालगढ़ के डॉ अभिषेक प्रताप सिंह ने इस संबंध में बताया कि मंजर पर रासायनिक दवा का छिड़काव करने से मधुमक्खियां एवं अन्य मित्र कीट पतंग मर जाते हैं। जिससे परागण का कार्य भी नहीं हो पाता है और फलों का उत्पादन भी काफी घट जाता है।
दवा का छिड़काव न करें
उन्होंने बताया कि आम के मंजर पर यदि फूल है तो किसी भी दवा का छिड़काव न करें। जो किसान दवा का छिड़काव मंजर आने से पहले कर चुके हैं उनके लिए ठीक है और जो मंजर आने के बाद दवा का छिड़काव किए हैं उनके लिए थोड़ी समस्या हो सकती है। दवा का छिड़काव करने से मधुमक्खियां और अन्य मित्र कीट-पतंग मर जाते हैं।

मंजर आ जाने के बाद करें कीटनाशक का इस्तेमाल
मंजर आने के क्रम में पुरवा हवा का चलन बढ़ेगा तो मंजर लगने तक इंतजार करना होगा। पूर्ण रुप से जब मंजर आ जाए तो कीटनाशक, फफूंदनाशक का इस्तेमाल कर सकते हैं। सालों भर कीट पतंग पेड़ पौधों में किसी न किसी तरह रहते हैं। इसलिए मंजर आने पर कीट पतंग ज्यादा लगने लगते हैं।

फल लगने के एक सप्ताह बाद करें सिंचाई
मंजर आने के बाद सिंचाई पर प्रतिबंध लगाकर उचित वातावरण का निर्माण करें ताकि पर्याप्त मात्रा में फल फूल लग सके। फल लगने के एक सप्ताह बाद पेड़ पौधों में सिंचाई अवश्य करें। इसके पूर्व सिंचाई नहीं करें। उन्होंने कहा कि बहुत आवश्यकता पड़ने पर ही मंजर पर जैविक ढंग से दवा का छिड़काव किया जा सकता है। जैसे नीम के तेल का छिड़काव से शत्रु कीट तो मर जाते हैं वहीं मित्र कीट सुरक्षित रहते हैं। गुम्मा रोग से ग्रस्त मंजर को तोड़ कर जला देना चाहिए। इससे फलों के पकने व झड़ने की समस्या कम होती है।

थिरामन ट्रैफ कार्ड से भी कीट को किया जा सकता है खत्म
बाजार में कई तरह के कीट पतंगों से बचने के लिए कीटनाशक उपलब्ध है। इनमें इफेक्ट ट्रैप कार्ड या थिरामन ट्रैफ कार्ड अलग ही तरह की कीटनाशक दवा है। साधारण रूप से यह चतुर्भुजाकार का होता है। इसमें गंधनुमा पदार्थ होता है जिसको आम लीची के पेड़ों पर लगा देने से कीट पतंग खुद ब खुद आकर्षित होकर चिपक कर मर जाती है।

इन दवाओं का करें इस्तेमाल
जब मटर के दाने के बराबर फल आ जाए तो कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत दवा के मेटासीस्टॉक्स एक एमएल एक लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। जब आम के दाने सुपारी के बराबर हो जाए तब प्लानोफिक्स नामक दवा से छिड़काव करें। एक पेड़ में 10-15 लीटर पानी के साथ दस से पंद्रह एमएल दवा पर्याप्त है। फलों का विकास क्रमानुसार होने के साथ बोरेक्स 05 ग्राम प्रति लीटर के घोल का छिड़काव 15 दिन के अंतराल में तीन बार करने से फलों के मिठास में वृद्धि होती है। वहीं फल के आकार, वर्ग, रंग में सुधार होता है। इससे फलों के पकने वह झड़ने की समस्या कम होती है।

Loading...