भक्तों पर बरसेगी महादेव की कृपा, महाशिवरात्रि पर इसबार दुर्लभ संयोग

नीरज झा/पूर्णिया
पूर्णिया/बिहार:  महाशिवरात्रि के महापर्व पर इस बार दो दिन भोलेनाथ की जलाभिषेक होगी। पंडित और पंचांगों में एकमत नहीं रहने के कारण फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी मंगलवार 13 फरवरी और बुधवार चतुर्दशी 14 फरवरी को महाशिवरात्रि मनाई जायेगी। हालांकि पंडितों की मानें तो दोनों तिथि को महाशिवरात्रि शास्त्रसम्मत है। महाशिवरात्रि पर कई दुर्लभ संयोग भी बन रहे हैं।
इस दिवस पर व्रत, पूजन के साथ जलाभिषेक और रुद्राभिषेक से महादेव की कृपा मिलती है। आचार्य सुमन मिश्र ने पंचांगों के हवाले से बताया कि 13 और 14 फरवरी को महाशिवरात्रि शास्त्रसम्मत है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों एवं पंचागों के अनुसार 13 फरवरी दिन मंगलवार को महाशिवरात्रि का व्रत करना उचित होगा।
अधिकांश पंचांगों में फागुन कृष्ण त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी मंगलवार 13 फरवरी को मनाने की बात है। हालांंकि, कुछ पंचागों के अनुसार महाशिवरात्रि का व्रत 14 फरवरी दिन बुधवार को भी कर सकेंगे। क्योंकि उस दिन चतुर्दशी युक्त निशिथकाल योग होने के कारण इस दिन भी व्रत मान्य है।
इस बार 13 एवं 14 फरवरी दोनों दिन भगवान शंकर का होगा जलाभिषेक, 14 फरवरी को चंद्रमा की युति बनने से योग बन रहा है, शिवरात्रि को लेकर तैयारी अपने अंतिम चरण में है। 14 को नव-पंचम योग में महाशिवरात्रि | पंडितोंं के मुताबिक फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी बुधवार 14 फरवरी को महाशिवरात्रि है। इस दिवस पर सिद्धि योग, रसकेसरी योग और नव-पंचम योग प्रमुख है। इस दिन शुक्र और चंद्रमा की युति बनने से रसकेसरी योग बन रहा है। वहीं गुरु के पंचम भाव में चंद्र रहने से नव-पंचम योग है। रसकेसरी से सुंदरता, प्रकृति प्रेम जाग्रत होता है।
महाशिवरात्रि भक्तों के लिए क्यों है खास
भगवान शिव की आराधना के लिए इस पर्व का विशेष महत्व है। माना जाता है कि इस रात में विधिवत साधाना करने से भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त की जा सकती है। बता दें कि यूं तो हर महीने की कृष्णपक्ष चतुर्दशी को मास शिवरात्रि मनाया जाता हैं लेकिन फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि की प्रधानता दी गई है। मान्यता है कि इस दिन ही भगवान शिव का माता पार्वती के साथ विवाह हुआ था। इस दिन शिवालयों में जलाभिषेक और पूजा अर्चना के लिए भक्त विशेष रूप से इकट्ठा होते हैं।
धरती पर भ्रमण करने निकलते हैं शिव
आचार्य ने शिवपुराण के हवाले से बताया कि शिवरात्रि का पूजन व व्रत करने से वर्षभर के शिवरात्रि के समान फल की प्राप्ति होती है। लगातार चौदह वर्ष तक शिवरात्रि का व्रत-पूजन करने से एक हजार अश्वमेघ यज्ञ के समान व सौ वाजपेय यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है।
13 को मंगलवार का है खास संयोग
13 की रात 10 बजे से 14 फरवरी की रात 12.20 बजे तक चतुर्दशी तिथि है। 13 को मंगलवार, जया योग और त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी का खास संयोग बना है। शास्त्रों में मंगलवार, रविवार को महाशिवरात्रि मनाने की बात कही गई है। जया योग रहने और त्रयोदशी के साथ चतुर्दशी संयोग से 13 को ही महाशिवरात्रि मनाना अधिक उपयुक्त है।
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