पूर्णिया: शराब की भट्टी में ‘शराबबंदी’ स्वाहा, छापेमारी 80 लीटर शराब जब्त

नीरज झा/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार:  नीतीश सरकार बिहार में शराबबंदी को अपनी बड़ी कामयाबी बता रही है। बिहार की उन्नति में इसे मील का पत्थर बता रही है। लेकिन इसकी हकीकत उतनी ही बदसूरत है। सरकार के शराबबंदी के दावे को बदसूरत इसलिए बताया जा रहा है क्योंकि सरकार के दावे केवल सरकारी मंच पर जवां होती है और कार्यक्रम के खत्म होने के बाद दम तोड़ देती है। और बाहर खुलेआम शराब की तस्करी की जाती है। हजारों लीटर शराब की बरामदगी इस बात को पुख्ता करती हैं सरकार ने भली ही शराब की बिक्री पर रोक लगा दी है लेकिन हकीकत ये है कि बिहार में शराब बिक रही है, लोग उसे खरीद रहे हैं और सरकार का शासन उसका पूरा तंत्र उन शराब माफियाओं के सामने लकवाग्रस्त हो चुका है।

रीनीपतरा में हुई शराब की बरामदगी और शराब की भट्टी में सरकार का दावे स्वाहा हो चुके हैं। रानीपतरा  मुफस्सिल थाना क्षेत्र में सोमवार को सघन छापेमारी मे 80 लीटर देसी शराब के साथ एक व्यक्ति को उत्पाद विभाग ने गिरफ्तार किया है। छापेमारी में रानीपतरा पैकगोला, राजीगंज मुसहरी टोला, बिलरिया में मुफस्सिल पुलिस और उत्पाद विभाग के एसआई रामनरेश महतो, एएसआई अनूप कुमार व पंकज कुमार की संयुक्त छापेमारी में रजीगंज मुसहरी टोला से शराब के नशे में 45 वर्षीय मंगल ऋषि पिता पांचू ऋषि को गिरफ्तार किया है।

वहीं रजीगंज पंचायत के मुसहरी टोला से कुछ शराबी भागने में सफल रहे। छापेमारी के दौरान कुल 18 लीटर निर्मित देसी शराब और 1000 लीटर अर्धनिर्मित शराब व नशीली गोलियां व पोस्ता बरामद हुआ है। छापेमारी में शराब बनाने वाले यंत्र को भी तोड़ फोड़ किया गया है। छापेमारी के दौरान गांव में हड़कंप की स्थिति उत्पन्न हो गई और पुलिस को देखते ही गृहस्वामी भाग निकले। वहीं इस संबंध में उत्पाद विभाग के राम नरेश महतो ने बताया कि गुप्त सूचना मिलने के बाद मुफस्सिल पुलिस को साथ लेकर एक टीम गठित की गई।

मुजफ्फरपुर में 9 स्कूली बच्चों का कातिल मनोज बैठा भी शराब के नशे में ही था। यही नहीं मनोज बैठा बीजेपी का नेता भी था। सीएम से लेकर डिप्टी सीएम और सियासी अश्वमेध जीत रही बीजेपी के नेताओं के साथ करीबी रिश्ते की तस्वीर उन मासूमों के परिजनों की आत्मा को इसलिए कचोट रही है क्योंकि  बिहार में बीजेपी सरकार की सहयोगी है। उसी सहयोगी पार्टी के एक नेता ने उनके घर के चिराग को बुझा दिया। और जब ये हादसा हुआ तब गुनहगार शराब के नशे में था। लेकिन अबतक सुशासन वाली सरकार के कोतवाल उस कातिल को ढूंढ नहीं पाए हैं।

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