पूर्णिया: शहर का लालगंज नाला 36 फीट चौड़ा से अब सिमटकर हो गया 10-15 फीट चौड़ा

पूर्णिया : शहर के विकास को लेकर तैयार किए गए मास्टर प्लान में नाला निर्माण व जलनिकासी की सुविधा को प्रमुखता के साथ स्थान दिया गया था। ताकि शहर में जलजमाव की समस्या न रहे। लेकिन शहर के बीचोंबीच बहने वाला लालगंज नाला अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका है।

इस नाले के विकास को ले आजतक कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई जा रही है। जिससे न सिर्फ नाला सिकुड़ता जा रहा है बल्कि साफ सफाई के अभाव में लोगांे की परेशानी भी लगातार बढ़ती जा रही है। इस नाले के आसपास रहने वाले लोग इस नाले की बदहाल स्थिति से परेशान हैं। स्थानीय लोगों की माने तो दो दशक पूर्व लालगंज नाले की चौड़ाई करीब 36 फीट थी और दोनों तरफ फुटपाथ भी था लेकिन वर्तमान में स्थिति कुछ ऐसी है कि अतिक्रमण के कारण नाले की चौड़ाई सिमटकर महज 10-15 फीट रह गई है।

बता दें कि आठ वर्ष बाद जहां मास्टर प्लान को लेकर सुगबुगाहट तेज हो चुकी है वहीं शहर के कई हिस्सों में आज भी जलजमाव की समस्या विकराल बनी हुई है। हल्की बारिश में ही पूरा शहर पानी पानी हो जाता है। लोगांे को पैदल चलना भी दुश्वार हो जाता है। दरअसल यह समस्या सड़क या फिर नाले के कारण नहीं बल्कि जलनिकासी की समुचित व्यवस्था के नहीं रहने के कारण है। शहर में आमतौर पर सभी गली मोहल्ले में नाले का निर्माण तो कर दिया गया है लेकिन उस नाले का पानी जाए कहां इसकी मुकम्मल व्यवस्था नहीं की गई है। जबकि करोड़ों रूपए नाला निर्माण तो लाखों रूपए मुख्य नालों की साफ सफाई में बहा दिए गए पर नतीजा सिफर है।

…शहर के मुख्य नालों से जोड़ने की है योजना : 

इस संबंध में नगर निगम के कनीय अभियंता शिवशंकर सिंह बताते हैं कि शहर के छोटे छोटे नालों को आपस में कनेक्ट कर आसपास के मुख्य नालों से कनेक्ट करने की योजना है। बता दें कि लालगंज नाला, भगेलु साह मुख्य नाले की पिछले साल डीएम प्रदीप कुमार झा के दिशा निर्देश पर उड़ाही की गई थी। जिसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि अब शायद शहर के मुख्य नाले का जीर्णोद्धार का कार्य भी होगा लेकिन बरसात के बाद मामला शांत हो गया। हालांकि मुख्य नाले के निर्माण व साफ सफाई काे लेकर अक्सर निगम की बोर्ड बैठक में मामला उठाया जाता है। इसके बाद भी शहर में मुख्य नालों की वर्तमान स्थिति बेहद नारकीय है।

...लाखों बहाए पर नतीजा सिफर : 

शहर की जलनिकासी का मुख्य नाला लालगंज की सफाई के नाम पर अबतक लाखों रुपए बहा दिए गए बावजूद अबतक यह शहर की गंदगी साफ करने में यह सक्षम नहीं हो पाया है। वर्ष 2015 में 20 लाख तो वर्ष 2017 में भी इतनी ही राशि से उक्त नाले की उड़ाही की गई लेकिन इसका लाभ अबतक नहीं मिल पाया है। निगम क्षेत्र में जलजमाव एक बड़ी समस्या बनी हुई है। नगर क्षेत्र में जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। न तो ड्रैनेज और न ही सीवरेज की समुचित व्यवस्था निगम क्षेत्र में की जा सकी है। जिस कारण शहरवासी खासकर बरसात में नारकीय स्थिति में रहने को विवश हो जाते हैं।

…सर्वेक्षण से आगे नहीं बढ़ पाई बात : 

सूत्रों की माने तो ड्रेनेज और सीवरेज निर्माण के लिए वर्ष 2005 में शहर का सर्वेक्षण कराने का निर्णय लिया गया। सरकार ने इसके लिए 80 करोड़ रुपए का डीपीआर भी तैयार कराया। लेकिन सर्वे करने वाली कंपनी डीपीआर पर आपत्ति जताते हुए वापस लौट गई। फिर डीपीआर का बजट बढ़ाकर करीब डेढ़ अरब किया गया। लेकिन पूरी राशि विमुक्त नहीं की गई। जिस कारण एक बार फिर सर्वे करने आई कंपनी वापस लौट गई। तबसे आज तक यहां के जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक पदाधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। हालांकि मास्टर प्लान को लेकर तेज हुई गतिविधि के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि शहर में नाला, सीवरेज व जलनिकासी की मुकम्मल सुविधा उपलब्ध होगी।

…पीएचईडी को मिला था ड्रेनेज निर्माण का कार्यभार :

डीएम आवास से लेकर लालगंज तक मुख्य नाले के निर्माण के लिए विभाग ने 11 करोड़ रुपए निर्गत किए थे। निगम ने इसे लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग को सौंपकर नाला निर्माण कराने का भार दिया। पीएचईडी ने इस कार्य के लिए निविदा भी निकाली लेकिन आजतक उस निविदा को फाइनल नहीं किया जा सका है।

...कहां से शुरु होता है मुख्य लालगंज नाला : 

लालगंज नाला पूर्णिया शहर का मुख्य नाला है। जो जिलाधिकारी के आवास से शुरु होकर उफरैल बाइपास पुल, लालगंज होते हरदा नदी में जाकर गिरता है। लालगंज नाले की लंबाई लगभग 06 किलोमीटर है। यह शहर के उफरैल, टैक्सी स्टैंड, सर्वोदय नगर, शिवपुरी, सुभाष नगर, मधुबनी, लाइन बाजार के कुछ इलाके, कचहरी, भंट्टा बाजार आदि इलाकों को कवर करता है।

…शहर के छोटे नालों की स्थिति भी बदतर : 

शहर के अंदर की तमाम छोटे छोटे नालों की स्थिति भी बेहद खराब है। स्थिति कुछ ऐसी है कि बरसात के दिनों नाले का पानी उफनकर बाहर अाने लगता है। मुख्य सड़कों को छोड़ दें तो शायद ही ऐसी कोई सड़क या मोहल्ला है जहां जलजमाव से लोगों को परेशानी नहीं होती हो। कई मुख्य सड़कों पर भी जल जमाव की स्थिति बनी रहती है। शहर के लाइन बाजार, नया टोला, नवरतन हाता, महबूब खान टोला समेत कई मोहल्लों में नालियों का पानी सड़कों पर आ जाता है। बिना बरसात के भी सड़कों पर झील सी स्थिति बनी रहती है।

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