कोटपा कानून तो बन गया, लेकिन पूर्णिया में इसका असर नहीं दिख रहा

 प्रियांशु आनंद/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार:  सार्वजनिक स्थल व स्कूलों के पास धूमपान के लिए बनाए गए नियम कोटपा (सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद) अधिनियम की धज्जियां उड़ाई जा रही है। विगत चार सालों से जुमार्ना वसूली के नाम पर महज खानापूर्ति हो रही है। ढंग से नियम का पालन नहीं कराने के कारण ही सरकारी दफ्तर, सार्वजनिक स्थल, सड़क किनारे, बाजार में धूम्रपान रुक नहीं रहा है। जिन अधिकारियों को इसे रोकने की जिम्मेदारी दी गई है उनके कार्यालय के पास ही जमकर इस कानून की धज्जी उड़ाई जाती है।

सरकारी कार्यालय स्कूल के आस पास सिगरेट गुटखा की सरेआम बिक्री हो रही है। दफ्तरों के अंदर और बाहर सिगरेट बीड़ी के कश लगाते लोग रोजाना देखे जा सकते हैं। पिछले चार वर्षों के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने सरकार को कोटपा से संबंधित एक भी रिपोर्ट नहीं भेजा है। इसके लिए गठित टीम के द्वारा उल्लंघन करने वालों से जुर्माना की वूसली नहीं की जाती है। जबकि गठित छापामारी दल को सप्ताह में एक दिन कोटपा अधिनियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ छापेमारी करने का निर्देश है।

लेकिन सप्ताह की बात तो छोड़िए वर्ष में एक भी दिन छापामारी नहीं की जाती है। तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम को प्रभावी संचालन के लिए समय-समय पर बैठक जरूर आयोजित की जाती है। परन्तु कोटपा से संबंधित धराओं का प्रचार-प्रसार नहीं किया जाता है। जबकि प्रमुख स्थानों पर तम्बाकू युक्त पदार्थो से होने वाली बिमारियों के बारे में बैनर पोस्टर के माध्यम से लोगों को जानकारी देना है परन्तु ऐसा कहीं दिखता नहीं है। स्कूलों के आगे बिकता है गुटखा विद्यालयों के आगे गुटखा की बिक्री धड़ल्ले से होती है। यहीं नहीं सार्वजनिक स्थल पर भी बिक्री होती है। बाजार में खूले आम सिगरेट का धुआं उड़ाते लोगों को देखा जा सकता है

जिला स्तर से प्रखंड स्तर तक बना है धावा दल
कानून को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए जिले से लेकर प्रखंड तक कमिटी बनी है। सरकार के द्वारा इनपर कानून का अक्षरश: पालन के लिए दायित्व भी सौंपा गया है। जिले में वरीय उपसमाहर्ता के जिम्मे इस कानून को पालन कराने की जिम्मेदारी है तो वहीं प्रखंड में बीडीओ को यह जिमेदारी दी गई है।

ये हैं प्रतिबंधित स्थल
कोटपा अधिनियम की धारा 4 के अंतर्गत सार्वजनिक स्थल जैसे होटल,रेस्टोरेंट,शैक्षणिक संस्थान,समस्त निजी एवं सरकारी कार्यालयों पर धूम्रपान करना प्रतिबंधित है। इस अधिनियम के तहत सभी सार्वजनिक स्थलों के प्रभारियों की ओर से धूम्रपान निषेध क्षेत्र वाले बोर्ड लगाना अनिवार्य है। धारा 6 के तहत शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज की परिधि में तंबाकू उत्पाद बेचना अपराध है। कोई व्यक्ति सार्वजनिक स्थलों पर बीड़ी सिगरेट गुटखा खाते व बेचते पकड़ा जाता है तो 200 रुपया जुर्माना का प्रावधान है। इसके अलावा तंबाकू विक्रेताओं की ओर से 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को तंबाकू उत्पाद बेचना दंडनीय अपराध है। इसके उलंघन करने पर 1 हजार से 10 हज़ार तक जुर्माना या 1 वर्ष से 5 वर्ष तक कारावास या फिर दोनों का प्रावधान है।

स्वाथ्य विभाग ने सारा ठीकरा प्रशासन के मत्थे पर फोड़ा
विभाग का कहना है कि यह कानून लॉ एंड आर्डर से जुड़ा हुआ है। किसी को पकड़ने के लिए पुलिस बल की जरुरत होती है। पकड़ने के दौरान कइयों से लड़ाई झगड़े की नौबत भी आ जाती है। और फिर उस से जुरमाना भी वसूलना होता है। ऐसी स्थिति में जब तक कोई पुलिस बल साथ नहीं होगा यह संभव नहीं है। इस कानून को पालन कराने के लिए प्रशासन के तरफ से वरीय उप समाहर्ता को नोडल ऑफिसर बनाया गया है। उनके आदेश का ही हमलोग पालन करते है। सदर अस्पताल की ही बात करे तो सबसे ज्यादा कोटपा कानून की धज्जी अस्पताल में ही उड़ती है।
हर हाल में किया जाएगा कानून का अनुपालन
इस ममले में क्षेत्रीय उपनिदेशक स्वास्थ्य डॉ. जगदीश प्रसाद ने कहा कितना जुर्माना वसूला गया है यह मेरे संज्ञान में नहीं है। लेकिन कोटपा कानून का अनुपालन हर हाल में किया जाएगा। इस बाबत अधिकारियों को दिशा निर्देश दिया जायेगा।

Loading...