पूर्णिया:दम तोड़ रही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसानों को नहीं मिल रहा कोई लाभ 

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार:कसबा प्रखंड के 1661 किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिला है। प्रखंड में केंद्र व राज्य सरकार ने किसानों को उनकी फसल की क्षति हो जाने के आलोक में मुआवजा राशि देने के लिए कई तरह की पहल की है। इसमें से एक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना है।

कसबा प्रखंड में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना दम तोड़ रही है। एक तो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जानकारी किसानों को नहीं है। लेकिन जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसल की बीमा कराई है फसल की क्षति होने के बाद फसल बीमा के विरुद्ध मुआवजे की राशि नहीं मिली है।

…त्राहिमाम कर रहे प्रखंड के किसान : 

वर्ष 2017 में खरीफ फसल के बीमित किसान की स्थिति त्राहिमाम जैसी है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 व 17 में आई बाढ़ ने किसानों की खरीफ फसल को बर्बाद कर दी थी। ऐसे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। किसानों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यह सर्वविदित है कि बाढ़ ने खरीफ 2017 की फसल को पूरी तरह प्रभावित कर दिया।

यह बात राज्य सरकार व प्रखंड प्रशासन के संज्ञान में भी है। आपदा के तहत वैसे गैर बीमित किसानों को 13 हजार 500 रुपया प्रति हेक्टेयर की दर से फसल क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जा रहा है।  जबकि बीमित किसान इससे वंचित हैं। दूसरी तरफ बीमा कंपनी भी ऐसे बीमित किसानों की सुधि भी अबतक नहीं ली है। किसान क्रेडिट कार्ड यानी केसीसी ऋण धारकों के बैंक खाते से बीमा कंपनी को प्रीमियम राशि संबंधित बैंक के द्वारा में दे दी गई है। पर, बीमा कंपनी की ओर से अबतक फसल क्षतिपूर्ति के आंकलन को लेकर कोई पहल नहीं हुई है।

जिला स्तर पर फसल बीमा के लिए नोडल पदाधिकारी के रुप में जिला सहकारिता पदाधिकारी को दायित्व दिया गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इसके क्रियान्वयन को लेकर विभिन्न स्तरों पर पहल की जाती है। पर, जमीनी स्तर पर इसका कुछ असर नहीं दिख रहा है। किसानों को इस योजना के बारे में एक तो पूरी जानकारी नहीं है।

जिन किसानों को योजना के बारे में जानकारी है वैसे किसान अपनी फसल का बीमा कराते हैं। पर, फसल क्षति होने के बाद बीमा राशि उसको प्राप्त नहीं होती। खासकर केसीसी धारक किसान की बीमा की प्रीमियम राशि संबंधित बैंक द्वारा काट ली जाती है। बैंक की तरफ से बीमा कंपनी को प्रीमियम राशि भेज दी जाती है। पर, जब फसल का नुकसान होता है तो फसल क्षतिपूर्ति के लिए कहां आवेदन देना है इसकी कोई व्यवस्था नहीं है।

…बीमा कंपनी का नहीं मिलता है सहयोग : 

बीमा कंपनी की ओर से भी फसल के व्यापक नुकसान के बाद भी किसी भी तरह का संपर्क बीमित किसानों से नहीं किया जाता है। ऐसे में बीमित किसान अपनी बदहाली पर खुद आंसू बहा रहे हैं।  साथ ही बैंक व अधिकारियों के यहां चक्कर भी लगा रहे है। पर, कहीं से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वर्ष 2017 में जब बाढ़ आई तो किसानों की खरीफ फसल को पूरी तरह नष्ट हो गई थी। किसान त्राहिमाम कर रहे हैं। रिलीफ कोड के तहत गैर बीमित किसानों को 13 हजार 500 रुपया प्रति हेक्टेयर की दर से अधिकतम दो हेक्टेयर तक फसल क्षतिपूर्ति के रूप में मुआवजा राशि देने का प्रावधान किया गया। ऐसे प्रभावित किसानों को बैंक के माध्यम से उसके खाते में राशि भेजी भी जा रही है। पर, बीमित किसानों के फसल नुकसान पर रिलीफ कोड के तहत मिलने वाली राशि प्राप्त नहीं हो रही है।

…रिलीफ कोड के तहत दिया जाएगा लाभ : 

कृषि विभाग के प्रधान सचिव ने इससे संबंधित पत्र जारी कर स्पष्ट किया था कि फसल बीमा योजना से आच्छादित किसानों को रिलीफ कोड के तहत क्षतिपूर्ति का लाभ नहीं दिया जाएगा। प्रधान सचिव के उसी पत्र के आलोक में किसानों को राज्य सरकार द्वारा दी जा रही क्षतिपूर्ति के लाभ से बीमित किसानों को वंचित होना पड़ा है।

दूसरी तरफ बीमा कंपनी भी किसानों के फसल क्षति पर मुआवजा नहीं दे रही है। इसी प्रखंड के महावीर प्रसाद साह ने बताया कि वर्ष 2016 में भी फसल बीमा का लाभ नहीं मिला। वर्ष 2017 की बाढ़ में तो पूरा धान की फसल ही नष्ट हो गई। फसल बीमा होने की वजह से राज्य सरकार से मिलने वाली क्षतिपूर्ति भी नहीं मिली। फसल बीमा कंपनी भी अबतक फसल का जायजा लेने के लिए नहीं आई है। फसल बीमा का लाभ नहीं मिलने से आर्थिक स्थिति काफी खराब हो चुकी है।

...डाटा जांचने के बाद दिया जाएगा लाभ : 

प्रखंड के लखना पंचायत के मो मुख्तार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसल की बीमा कराई। खरीफ 2017 के तहत बड़ी तादाद में किसानों ने धान की रोपनी की थी। पर, बाढ़ में धान की फसल पूरी तरह से नष्ट हो गई। वहीं इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल योजना को-ऑपरेटिव देखरेख करते हैं इसका जिम्मा जिला सहकारिता पदाधिकारी के पास होता है और डाटा भी उसी के पास होता है। अगर ऐसी बात है तो इसकी जांच की जाएगी। जिन किसान को फसल बीमा लाभ नहीं दिया गया है उसे योजना का लाभ दिया जाएगा।

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