पूर्णिया: चार करोड़ खर्च करने के बाद भी नहीं बदली काझा कोठी पार्क की सूरत

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया

पूर्णिया/केनगर/बिहार:  प्रखंड स्थित काझा कोठी पार्क की स्थिति काफी दयनीय हो गई है। यहां न तो शुद्ध पेयजल और न ही साफ सफाई की कोई व्यवस्था की गई है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी यहां आए थे तो इस पार्क की स्थिति को देखते हुए यहां के पदाधिकारियों को जमकर फटकार लगाई थी। बता दें कि यह पार्क पूर्व मुख्यमंत्री स्व. भोला पासवान शास्त्री जी के नाम पर रखा गया है और उनकी एक प्रतिमा भी काझा कोठी पार्क के मुख्य द्वार के पास लगाई गई है।

जीतन राम मांझी के द्वारा काझा कोठी पार्क के जीर्णोद्धार के लिए चार करोड़ रूपए की स्वीकृति दी गई थी और उस रूपए से काम भी शुरू किया गया। लेकिन धरातल पर कोई कार्य नजर नहीं आता है। पार्क को सुंदर बनाने के लिए जो पत्थर की ईंट का प्रयोग किया गया था वह भी जगह जगह से निकाल ली गई है और सारा पत्थर काझा कोठी के बीचोंबीच बने तालाब में समा चुका है। तालाब को घेरने के लिए जिस ग्रिल का प्रयोग किया गया है वह ग्रिल कम लोहे की पत्तर ज्यादा लगती है। यहां पर दो गार्ड की भी तैनाती की गई है। रात्रि प्रहर के लिए गोपाल राम तो दिन में पार्क की रखवाली के लिए उमाशंकर राम को तैनात किया गया है। इन दोनों ने बताया कि हम दो लोग क्या करेंगे। सामने आते हैं तो लोग पीछे से पार्क में प्रवेश कर जाते हैं। वहीं मासिक सैलेरी के बारे उन्होंने बताया कि हमलोगों को न्यूनतम मजदूरी से भी कम सैलेरी दी जाती है।


पार्क में नहीं है पेयजल की व्यवस्था
काझा कोठी पार्क की बदहाली का आलम यह है कि पार्क में अबतक शुद्ध पेयजल तक की व्यवस्था नहीं की गई है। जबकि शुद्ध पेयजल के लिए जगह जगह पर नल लगाया गया है लेकिन रखरखाव के अभाव में यह भी खराब हो चुका है। मूल रूप से देखा जाए तो यह पार्क खुले में शौच करने का अड्‌डा बन चुका है। जहां दिन हो या रात लोग बेफिक्र होकर शौच करने पहुंचते हैं और प्रशासनिक उदासीनता के गवाह बनते हैं। आसपास के इलाके के लोग शौच करने के लिए पार्क को सबसे मुफीद स्थान समझते हैं और दर्जनों की संख्या में लोग झुंड बनाकर खुले में शौच करने को आते हैं। पार्क में पेयजल की व्यवस्था भले ही न हो लेकिन शौच निवृत्त करने वालों को तालाब का पानी जरूर नसीब हो जाता है।
चार करोड़ की लागत से पार्क का किया गया था जीर्णोद्धार
चार करोड़ की लागत से पार्क का जीर्णोद्धार किया गया था। ठेकेदार द्वारा किया गया काम तो स्पष्ट रूप से दिखता है लेकिन आजतक किसी प्रशासनिक पदाधिकारी ने न तो ठेकेदार की कार्यशैली पर नाराजगी दिखाई और न ही ठेकेदार ने दोबारा झांकने की जहमत उठाई। लिहाजा, पार्क की स्थिति दिनोंदिन बद से बदतर हो चुकी है। करोड़ों रूपए खर्चने के बाद भी पार्क की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। जिससे स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश का माहौल है। जबकि ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो इस पार्क का सही तरीके से रखरखाव किया जाए तो बेशक इससे सरकार को लाखों का राजस्व प्राप्त होगा।
आरडीडीई के जिम्मे है पार्क का रखरखाव
केनगर के बीडीओ राकेश कुमार बताते हैं इस पार्क की सारी जिम्मेवारी आरडीडीई के हाथों में है इसलिए इस संबंध में कुछ खास जानकारी नहीं दे सकता हूं।

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