पूर्णिया:बच्ची की मौत के बाद परिजनों व ग्रामीणों ने सात घंटे तक पीएचसी में किया प्रदर्शन 

 प्रियांशु आनंद/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार : शनिवार को पीएचसी जलालगढ़ में नवजात शिशु की मौत के बाद परिजनों ने हो हंगामा शुरू कर दिया। देखते ही देखते सैकड़ों ग्रामीण पीएचसी में पहुंचकर धरना प्रदर्शन करने लगे।

मौके पर थानाध्यक्ष गुलाम शहबाज आलम, सीओ फईमउद्दीन अंसारी, बीडीओ मोनालिशा प्रियदर्शनी पहुंचकर आक्रोशित लोगों को शांत कराने की कोशिश करने लगे। प्रसूता की सास लक्ष्मी देवी ने बताया कि 12 बजे रात में अपनी बहू को प्रसव पीड़ा होने पर पीएचसी लाई। 3:45 बजे मेरी बहु ने नवजात शिशु को जन्म दिया और जन्म के बाद बच्चा स्वस्थ था।

नवजात बच्ची के जन्म के बाद एएनएम सो गई और अन्य लोगों के द्वारा सूई देने से बच्ची की स्थिति बिगड़ने लगी। मृतक नवजात शिशु के पिता अभय कुमार ने जब बच्ची को देखने के लिए एएनएम को कहने गए तो एएनएम ने कहा कि मैं सौ गई हूं सुबह देखूंगी। उसके बाद पीएचसी में कार्यरत ममता को एएनएम ने बच्ची को सुई लगाने को कहा। ममता ने भी बच्चे को सुई लगा दी।

जिसके बाद बच्ची की स्थिति बिगड़ने लगी। बच्ची की स्थिति बिगड़ते देख मैं डॉक्टर के पास गया तो डॉक्टर सो रहे थे तो उन्हें जगाया। करीब 20 मिनट की देरी से डॉक्टर पहुंचे और बच्ची की जांच की तो बच्ची की मौत हो चुकी थी। जिसके बाद परिजनों में मातम छा गया और रो रोकर बुरा हाल हो गया।

परिजनों ने पीएचसी प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सीएस को बुलवाने की मांग पर अड़े रहे। बाद में अपर चिकित्सा प्रभारी डॉ राजेंद्र प्रसाद व स्थानीय जनप्रतिनिधि व बुद्धिजीवियों ने प्रदर्शनकारियों को समझा बुझाकर मामले को शांत करवाया व दोषी एएनएम एवं डॉक्टर पर अविलंब कार्रवाई किए जाने का भरोसा दिया।

वहीं प्रदर्शन कारियों ने बीडीओ, सीओ व चिकित्सा पदाधिकारी एसएमओ को लिखित रूप से चार मांगों को ले अपर चिकित्सा पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। जिसमें दोषी डॉक्टर व एएनएम को अविलंब हटाने, मुख्यमंत्री कोष से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने तथा पीएचसी की लचर व्यवस्था को दुरुस्त करने एवं पीएचसी में मौजूद डॉक्टर व सभी कर्मियों का स्थानांतरण कराने की मांग शामिल है।

इस पर अपर चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राजेंद्र प्रसाद ने परिजनों को जल्द कार्रवाई का भरोसा दिया, जिसके बाद मामला शांत हुआ। कसबा विधायक मो आफाक आलम ने इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पीएचसी प्रशासन की लापरवाही के कारण यह घटना हुई है। जिलाधिकारी एवं स्वास्थ्य विभाग से पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपए बतौर मुआवजा दिलाने व दोषियों पर अविलंब कार्रवाई की मांग की गई है।

अस्पताल में लापरवाही बरती जा रही है और इसका खामियाजा यहां के लोग भुगत रहे हैं। पूर्व में भी कई बार पीएचसी की बदहाली की आवाज सदन में उठा चुका हूं। सीएस से पीएचसी प्रभारी के बदलने की बात की थी लेकिन प्रभारी तो नहीं बदले सीएस बदल गए। जिसके लिए प्रभारी को बदलने की बात वर्तमान सीएस से की है।

इधर, प्रदर्शनकारी पीएचसी के मेन गेट पर प्रदर्शन कर रहे थे। वहीं मरीज अपने इलाज के लिए सुबह से भटक रहे थे। करीब 11:30 बजे ओपीडी शुरू हुई। उसके बाद मरीजों का इलाज शुरू किया गया। प्रात:कालीन ओपीडी सुबह 8 बजे से 12 बजे तक होती है लेकिन ओपीडी में डॉक्टर 10:30 पहुंचे ही थे। मरीजों को इलाज के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। 15 किमी दूर एकम्बा पिपरपति से इलाज कराने को आईं अमीना खातून बताती हैं कि सुबह 8 बजे यहां आए हैं 11 बज गया अभी तक पर्ची तक नहीं मिला है।

बच्चा जल गया था जिसका इलाज करवाने आए हैं। पनखोवा की बीबी मोहरातन अपने पति को टीबी की बीमारी का इलाज के लिए पहुंची थी। जिसका इलाज नहीं हो पाया और हो हंगामा के कारण बिना जांच कराए ही वापस लौटना पड़ा।

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