Exclusive पूर्णिया: जलालगढ़ PHC में कुत्ते-बकरी के साथ रहते हैं मरीज, OPD में कुत्तों का बसेरा

नीरज झा/पूर्णिया
पूर्णिया/बिहार:  जिले के जलालगढ़ प्रखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जलालगढ़ में मरीजों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है। यहां की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार की संध्या 4:00 बजे करीब 18 महिलाओं का फैमली प्लानिंग के तहत ऑपरेशन किया गया और बिना किसी जांच के ही सभी महिलाओं का ऑपरेशन कर यूं ही छोड़ दिया गया। यह ऑपरेशन यहां के प्रभारी डॉ भीमलाल पासवान ने किया। इन महिलाओं का ऑपरेशन कर यूं ही जमीन पर लिटा दिया गया और न तो मरीजों को बेड और न ही कंबल की सुविधा दी गई। जिससे मरीजों के परिजनों के बीच काफी आक्रोश का माहौल दिखा।
परिजनों का कहना था कि बिना किसी जांच के ऑपरेशन किया गया जबकि अस्पताल में एक लैब टेक्नीशियन पदस्थापित हैं। परिजनों को भी इस व्यवस्था से काफी परेशानी हुई और उन्हें रातभर अस्पताल में बदहाली का सामना करना पड़ा। मरीजों के रखने की कोई व्यवस्था पीएचसी की ओर से नहीं की जाती है। मरीजों को ऑपरेशन थियेटर से निकाल कर सीधे फर्श पर बोरा, चट्टी जो घर से लेकर आते हैं बिछाकर सुला दिया जाता है। जबकि फर्श पर गंदगी होने व ठंडा होने से मरीजों को इंफेक्शन होने का भी खतरा बना रहता है।
मरीज के साथ आए परिजनों को भी बैठने तक की सुविधा इस पीएचसी में  उपलब्ध नहीं है। परिजनों ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या शौचालय की है। खासकर महिलाओं को शौच के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है। पीएचसी में सिर्फ एक शौचालय है जिसमें हर वक्त ताला लटका रहता है। ऐसे में यहां इलाज कराने पहुंचने वाली महिलाओं व उनके परिजनों को खुले में शौच जाना पड़ता है।
नहीं होती है साफ सफाई
पीएचसी जलालगढ़ में साफ सफाई का नितांत अभाव है। गंदगी के बीच ही मरीजों का इलाज किया जाता है। इसके अलावा मरीजों के लिए भोजन की भी समुचित व्यवस्था नहीं रहती है। मंगलवार को इलाज कराने पहुंची महिलाओं ने कहा कि सुबह उन्हें खिचड़ी दी गई जिसमें न तो दाल की मात्रा थी और न ही अन्य सामग्री। जबकि मरीजों के लिए 100 रूपए प्रति प्लेट तक भोजन देने का प्रावधान तय किया गया है। यहां की कुव्यवस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ओपीडी कक्ष में कुत्ता घूमता और मरीजों के बीच बकरी व कुत्ता सरेअाम देखने को मिलते हैं। मरीजों के बीच जानवरों के मौजूद होने से संक्रमण का खतरा बना रहता है लेकिन अस्पताल प्रबंधन इन तमाम बातों से कोई इत्तेफाक नहीं रखता है।
पेड़ के नीचे और अस्पताल के बाहर मरीज बिताते हैं रात
नहीं दिया जाता है कंबल और चादर
अपनी पत्नी का ऑपरेशन कराने पीएचसी जलालगढ़ पहुंचे उपेंद्र ठाकुर कहते हैं कि अस्पताल में काफी भीड़ रहती है और किसी तरह फर्श पर सोकर रात बिताए। पीएचसी की ओर से न तो चादर और न ही कंबल दिया गया। यहां शौचालय की स्थिति काफी नारकीय है। वहीं संतोषनगर की रूबी देवी के साथ आई उसकी मां मीरा देवी का कहना है कि पीएचसी में मरीजों को जानवरों की तरह रखा जाता है। सुबह 8:00 बजे तक कोई भी डॉक्टर या कर्मी  मरीजों को देखने तक नहीं आते हैं। चक जलालगढ़ की बिजली देवी अपनी नतनी नीतू कुमारी का ऑपरेशन कराने आई थीं। उनका कहना है कि पीएचसी में एक भी महिला शौचालय नहीं है जो है उसमें ताला लटका रहता है।
इस रिसेप्शन काउंटर से क्या कोई सहायता मिल सकती है?
यहां इलाज कराने को आने वाली महिलाएं शाम हाेने का इंतजार करती हैं। शिभा देवी अपनी बहू को लेकर पीएचसी इलाज कराने आई हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह से यहां ऑपरेशन किया जाता है और मरीजों को यूं ही छोड़ दिया जाता है, उससे संक्रमण फैल सकता है। सुबह जो खिचड़ी दी गई उसमें न तो दाल नजर आ रही थी न ही हल्दी। हमलोगों को मजबूरी में सुबह आम के पेड़ के पास चट्टी बिछाकर बैठना पड़ रहा है। साफ सफाई भी नहीं हुई है। अंदर जितनी गंदगी है उससे तो स्वस्थ इंसान भी बीमार पड़ जाए।
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