पूर्णिया में करोड़ों की लागत से नहर बना लेकिन किसानों को अबतक पानी नहीं मिला

पूर्णिया में करोड़ों की लागत से नहर बना लेकिन किसानों को अबतक पानी नहीं मिला

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार:  वर्ष 1957 में हुए सर्वे के बाद भीमनगर से पूर्णिया कटिहार सब डिवीजन तक बड़ी नहर का निर्माण करोड़ों की लागत से हुआ था। इसके बाद से किसानों को सिंचाई कार्य में फायदा होने लगा था। समय पर किसान सिंचाई विभाग को लगान दे रहे थे। लेकिन विगत दस वर्षों से व्यवस्था जो पटरी से उतरी है वह आज तक नहीं सुधरी है। समय पर नहर में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण किसानों को ज्यादा रकम अदा कर पंपसेट से अपने खेतों में पटवन करना पड़ता है।

इस लापरवाही से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। एक तो उन्हें नहर के पानी के लिए लगान देना पड़ता है दूसरे महंगे दाम पर डीजल खरीदकर फसल की सिंचाई से खेती की लागत बढ़ जाती है। विदित हो कि कसबा प्रखंड में लगभग 200 हेक्टेयर में नहर के पानी से सिंचाई की जाती है। लेकिन विभागीय लापरवाही के कारण किसानों को परेशानी झेलनी पड़ती है। विदित हो कि आठ वर्ष पूर्व नहर को दुरुस्त करने के लिए साफ सफाई की गई थी। लेकिन उसके बाद भी जब नहर में पानी छोड़ा गया तो तीन चार जगह मेड़ टूट गई थी। जिसके चलते दर्जनों एकड़ में किसानों द्वारा लगाई गई फसल पानी में डूबने से नष्ट हुई थी।

जिससे किसानों को लाखों का नुकसान हुआ था। हालांकि मेड़ टूटने के बाद तुरंत ही विभाग द्वारा उसे दुरुस्त किया गया था। नहर से पानी पटवन के लिए छोटे छोटे चैनल भी निकाले गए थे। देखरेख के अभाव में चैनल भी ध्वस्त हो गया। जिसके फलस्वरूप नहर में पानी रहने के बावजूद किसानों को उसका लाभ नहीं मिल पाता है। इस संबंध में सिंचाई विभाग एसडीओ विकास कुमार ने बताया कि सरकार का आदेश है नहर में पानी नहीं छोड़ा जाए। क्योंकि नहर तथा नाली पूरी तरह दुरुस्त नहीं है। नहर को पूरी तरह से दुरुस्त करने के बाद विभाग द्वारा नहरों में पानी छोड़ा जाएगा।

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