पूर्णिया: 39 एकड़ में मक्के के फसल में नहीं निकला दाना, किसान परेशान

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार:  केनगर प्रखंड क्षेत्र के रहुआ पंचायत के किसान ने मक्के की खेती की थी और 18 अक्टूबर को पायोनियर कंपनी के 3522 मक्का अपने खेतों में लगाया था। खेत में पौधा तो बहुत सुंदर निकला। पौधे देखकर किसानों के चेहरे खिल उठे और जी तोड़ मेहनत किया। लेकिन जब बाली निकली तो उसमें दाना नहीं है। यह देखकर किसान हतप्रभ एवं परेशान हैं। अब उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि वह क्या करें।

किसान दिवाकर झा ने बताया कि मैंने अपने तीन एकड़ खेत में मक्के की खेती बैंक और गांव के साहूकारों से कर्ज लेकर की थी। अब तो बाली में दाना नहीं होने से हमलोग भुखमरी के कगार पर आ खड़े हुए हैं। अब हमलोग न तो बैंक का कर्ज दे सकते हैं और न साहूकारों को उसके रूपए ही लौटा सकते हैं। दिवाकर झा ने सरकार से इस ओर ध्यान आकर्षित  करते हुए कहा कि सरकार हमलोगों के ऊपर ध्यान दें या फिर बैंक का कर्ज ही माफ कर दे। ताकि हमलोग सुख शांति से रह सके।

संजय बनर्जी, जैविक खेती के जानकार

क्या कहते है जैविक खेती के जानकार संजय बनर्जी
रसायनिक खेती की ओर हम इस कदर जा रहे है कि अब हमारी मिट्टी बंजर हो रही है। जमीनों से केंचुआ गायब हो रहे है ।जिस वजह से मिट्टी को ऑक्सीजन प्राप्त  नहीं हो पा रहा। जिस वजह से दोगुना पैसा लगाने पर भी आधा फसल प्राप्त होता है और किसान कर्जदार हो जाते है। कई केस ऐसे सुनने में आते रहते है कि किसान हाइब्रीड बीज का इस्तेमाल कर फसल लगाते हैं और फसल में दाना ही नहीं आता।इसीलिए अब हमें सबसे ज्यादा जरुरी है कि हम जैविक खेती करें और हाइब्रीड बीज को त्याग कर खुद का बीज इस्तेमाल में लाये। और कर्जमुक्त एवं रोगमुक्त बनें ।

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