नीतीश बाबू पूर्णिया के मौत के पुल को देखिये, मुआवजा बांटने का इंतजार मत कीजिये

 प्रियांशु आनंद/पूर्णिया

पूर्णिया/बिहार:  रूपौली विधानसभा क्षेत्र के बड़हरा कोठी प्रखंड अंतर्गत गोपीनगर परसा गांव में अंग्रेजों के जमाने का 200 वर्ष पुराना काठ पुल अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। जर्जर हो चुके इस काठ पुल से होकर सिर्फ लोग पैदल ही आवागमन करते हैं जबकि छोटे बड़े वाहन चालक 14 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय कर प्रखंड मुख्यालय तक पहुंचते हैं। जो हर लिहाज से लोगों के लिए परेशानी का सबब है। बता दें कि आजादी के सात दशक बाद भी इस काठ पुल की न तो कभी मरम्मत की गई और न ही इसे हटाकर जिला प्रशासन या फिर जनप्रतिनिधियों द्वारा पुल बनाने की पहल की गई।

इस वजह से आसपास के इलाके के पांच पंचायतों के 52 हजार लोग प्रभावित हो रहे हैं। उन्हें आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर बरसात के दिनों में, जब नदी उफनने लगती हैं तो पैदल चलना भी इस काठ पुल पर जानलेवा साबित होता है। प्रशासनिक उदासीनता का आलम यह है कि इन पंचायतों के लोग आपस में ही चंदा इकट्‌ठा कर काठ पुल को किसी तरह दुरूस्त कराते हैं और आवागमन करते हैं। चुनावी मौसम में जनप्रतिनिधियों द्वारा वायदे तो खूब किए जाते हैं लेकिन चुनाव बीतने के बाद काठ पुल को यूं ही छोड़ दिया जाता है। हालांकि इन दिनों एक बार फिर गांव के लोगों में इस बात की खुशी है कि स्थानीय विधायक व सांसद द्वारा काठ पुल की मरम्मती की बात कही गई है लेकिन यह कार्य कब शुरू होगा इसका खुलासा नहीं किया गया है।

पूर्णिया के गोपीनगर परसा गांव में बना है मौत का पुल

कई बार हो चुके हैं हादसे
इस जर्जर काठ पुल से होकर आवागमन करने के चक्कर में कई बार ग्रामीण हादसे के शिकार भी हो चुके हैं। महज एक माह पूर्व ही बड़हरा पंचायत के सरपंच मो शकील परवेज इस काठ पुल के नीचे गिरने से बुरी तरह से घायल हो चुके हैं। यही नहीं आए दिन छोटी बड़ी दुर्घटनाएं होती रहती हैं। इसके बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कुछ भी नहीं हो रहा है। लोग जान जोखिम में डालकर मजबूरन कदई धार पर बने इस काठ पुल से होकर आवागमन करने को विवश हैं।

इस पुल से होकर आसपास के लोग अपने बच्चों को स्कूल भी पहुंचाते हैं। बता दें कि कदई धार में सालोंभर पानी का बहाव रहता है और बरसात के दिनों इस धार में पानी का स्तर काफी बढ़ जाता है। बीकोठी के गोपीनगर परसा पुल के एक तरफ प्राथमिक विद्यालय गोपीनगर और दूसरी तरफ मध्य विद्यालय गोपीनगर परसा है। जहां प्रतिदिन सैकड़ों की तादाद में स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर पठन पाठन को आते जाते हैं।
इन पंचायतों के लोग हो रहे हैं प्रभावित
कदई धार में बने काठ पुल से होकर बड़हरा पंचायत के परसा, मौजमपट्‌टी, हल्दीबाड़ी, गोपीनगर, मुलकिया, सहसोल, सहसोल बोधी टोला, राजघाट, दिवरा बाजार समेत कई अन्य गांव के लोग आते जाते हैं। प्रखंड मुख्यालय को जोड़ने के लिए इन पंचायतों के लोगों का यही एकमात्र कम दूरी का रास्ता है। कई बार इसे दुरूस्त करने की मांग उठी लेकिन हरेक बार सिर्फ आश्वासन की घुट्‌टी ही पिलाई गई। बता दें कि इस काठ पुल के दोनों तरफ सड़क का निर्माण तो कर दिया गया है लेकिन पुल का निर्माण नहीं होने से परेशानी बनी हुई है। पुल निर्माण नहीं होने से स्थानीय लोगों में आक्रोश का माहौल पनपने लगा है और उन्होंने एकस्वर में जल्द से जल्द पुल निर्माण की मांग जिला प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से की है।

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