पुर्णिया: NH 107 पर मधेपुरा से बनमनखी तक का सफर मौत की सड़क पर होता है

प्रियांशु आनंद/पुर्णिया

पुर्णिया/बिहार:  वैसे तो आम यात्रियों के लिए मधेपुरा से बनमनखी से धरहरा तक का सफर खतरों से भरा है, लेकिन एनएच 107 पर बने बड़े गड्ढे मरीजों के लिए अभिशाप हैं। संयोग है कि अब तक कोई बीमार व्यक्ति इन गड्ढों का शिकार नहीं बना हुआ है। लेकिन गंभीर रुप से बीमार के सामने यह अंदेशा बना रहता है। खासकर मुरलीगंज बॉर्डर के पास के गांवों चैनपुरा, बोरारही, नौलखी आदि के लोगों के अस्पताल पहुंचना किसी बीमारी से निजात मिलने से कम नहीं है।

जानकीनगर के मध्यवर्ती इलाके के लोगों के लिए एनएच 107 की स्थिति तो और भी पीड़ा दायक है। आजाद चौक, मिरचाईबाड़ी, बिनोवाग्राम, चांदपुर भंगहा जैसे आधा दर्जन गांवों के लोगों के लिए इलाज के लिए अस्पताल का सफर काफी दुर्गम है। बनमनखी के धरहरा से मुरलीग॔ज बोर्डर तक 22 किलोमीटर के अंदर सौ गड्ढे हैं। इनमें तीन दर्जन से अधिक बड़े- बड़े गड्ढे बने हुए हैं। जिससे इन 22 किलोमीटर के फासले को तय करने में डेढ़ से दो घंटे तक का समय लगता है।

मुरलीगंज के बॉर्डर पर बसे गांवों के लिए थोड़ी राहत भरी बात यह है कि वे लोग तीन चार किलोमीटर की दूरी तय कर मुरलीगंज पीएचसी तक पहुंच जाते हैं। लेकिन जानकीनगर के मध्य वाले गांवों के लिए जितनी दूरी बनमनखी है, उतना ही दूर मुरलीगंज है। लिहाजा उनके लिए डाक्टरों तक पहुंच पाना टेढ़ी खीर बन जाता है। दो लेन की सड़क के निर्माण की घोषणा से जितना लोगों में खुशी हुई थी, उससे अधिक क्षोभ अब तक क्रियान्वयन नहीं होने से है। सड़क निर्माण में कच्छप गति से अब लोगों के सब्र का बांध टूटता जा रहा है। लोगों ने इस दिशा में प्रशासनिक उदासीनता पर चिंता जताई है।

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