पूर्णिया: बच्चे स्कूल की बजाय वहां जा रहे हैं जहां उन्हें नहीं जाना चाहिए, ऐसा क्यों?

प्रियांशु आनंद/पूर्णिया
पूर्णिया, कसबा/बिहार:  प्रखंड की आबादी तकरीबन डेढ़ लाख से ज्यादा है। विभागीय जानकारी के अनुसार प्रखंड भर में करीब 69 प्राथमिक विद्यालय, 40 मध्य विद्यालय, संकुल 109 विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। ये आंकड़ें सिर्फ सरकारी विद्यालयों का है। जिसमें करीब 30-40 हजार बच्चे नामांकित हैं। विद्यालयों में पठन पाठन के लिए करीब पांच सौ से ज्यादा शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। सरकारी नियमानुसार प्रति 40 छात्र छात्राओं पर एक शिक्षक की पदस्थापना की गई है। लेकिन वर्तमान में 55 छात्रों के पठन पाठन का कार्य एक शिक्षक के कंधे पर है।
इतना ही नहीं यह आंकड़े तो सिर्फ सरकारी विद्यालयों के हैं। कमोबेश इतने ही छात्र छात्रा प्राइवेट विद्यालयों में भी अध्ययनरत हैं। खास बात यह है कि बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा नि:शुल्क दी जा रही है। स्कूल में भोजन कपड़े और छात्रवृति के माध्यम से बच्चों को शिक्षा के अलावा भी सुविधाएं दी जा रही है। इसके बावजूद इन बच्चों का स्कूल नहीं पहुंचना कहीं न कहीं विभागीय व्यवस्था की पोल खोल रही है।
बालश्रम को रोकने के लिए भी श्रम विभाग द्वारा इस दिशा में ठोस पहल नहीं की जा रही है। जानकारों की मानें तो श्रम विभाग इस मामले में सिर्फ कागजी खानापूर्ति में लगा है। विभाग सक्रिय रहता तो शायद ऐसे बच्चों के हाथों में किताब व कलम होता।
स्कूल जाने के बजाए इधर उधर भटकने वाले बच्चे जल्द ही नशा की चपेट में आ जाते हैं और बाद में चाहत पूरी करने के लिए अपराधी तक बन जाते हैं। इस संबंध में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी महेंद्र प्रसाद मंडल ने बताया कि ऐसे मामलाें पर विभाग की कड़ी नजर है। जो बच्चे विद्यालय नहीं जाते हैं उनके अभिभावकों को जागरूक किया जाता है। जहां तक बाल मजदूरी की बात है तो अगर बाल मजदूरी करवाते संचालक पकड़े जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
Loading...